प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में हरियाणा के विकास एवं पंचायत निदेशक कार्यालय के पूर्व अधीक्षक नरेश कुमार को गिरफ्तार किया है। ईडी ने नरेश कुमार को 10 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। उन्हें विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 जून तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
ईडी की जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकूला के दो निजी स्कूलों के IDFC फर्स्ट बैंक खातों से करीब 645 करोड़ रुपये के सरकारी धन का गबन किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में विक्रम वाधवा मुख्य आरोपियों में से एक है। उस पर रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी करने का आरोप है।
ईडी का कहना है कि नरेश कुमार को सीधे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक एक फर्जी (शेल) कंपनी से धन मिला था। इसी कंपनी के जरिए सरकारी धन को कथित तौर पर इधर-उधर किया गया था। जांच में यह भी पता चला है कि नरेश कुमार ने न केवल अपने बैंक खातों में सरकारी धन प्राप्त किया, बल्कि धन के गबन और उसे छिपाने में एक महत्वपूर्ण बिचौलिए की भूमिका भी निभाई। ईडी के अनुसार, उनके और उनके परिवार के खातों में अपराध से अर्जित लगभग 1.20 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। इसके अलावा गबन की गई रकम से निकाली गई बड़ी मात्रा में नकदी भी उन्हें पहुंचाई गई।
ईडी ने बताया कि इस घोटाले में कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के खातों में सरकारी विभागों से सीधे धन ट्रांसफर किया गया और बाद में रकम को विभिन्न खातों के जरिए घुमाकर छिपाया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन शेल कंपनियों से सैकड़ों करोड़ रुपये विभिन्न ज्वैलर्स के खातों में भेजे गए। बदले में ज्वैलर्स ने बैंकिंग लेनदेन के जरिए प्राप्त राशि के बदले नकद रकम उपलब्ध कराई। इसके बाद यह नकदी विभिन्न सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई, जिनमें नरेश कुमार भी शामिल हैं। ईडी ने कहा है कि पूरे मनी ट्रेल का पता लगाने और इस घोटाले से लाभ उठाने वाले अन्य लोगों तथा खरीदी गई संपत्तियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। इस मामले में इससे पहले रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।