प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने मामले में पूछताछ के बाद अग्रवाल को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के साथ एजेंसी की चल रही जांच में एक बड़ा नया मोड़ आया है।
यह गिरफ्तारी ED की ओर से मामले में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच किए जाने के करीब दो महीने बाद हुई है। एजेंसी ने 28 मई को PMLA, 2002 के तहत तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किए थे। इन आदेशों के तहत करीब 200 करोड़ रुपये की डीड वैल्यू और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित बाजार कीमत वाली संपत्तियों को अटैच किया गया।
ED के मुताबिक, यह जांच रायपुर की Economic Offences Wing (EOW) और Anti-Corruption Bureau (ACB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई। जांच एजेंसी का आरोप है कि कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा के नेतृत्व में एक शराब सिंडिकेट ने 2019 से 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में कथित तौर पर हेरफेर किया।
ED का दावा है कि इस नेटवर्क ने शराब की खरीद दरों में कथित हेरफेर, बिना हिसाब-किताब वाली शराब के अवैध उत्पादन और चुनिंदा संस्थाओं को जारी FL-10A लाइसेंस के जरिए कमीशन वसूलकर 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय पैदा की। ED की पहली अटैचमेंट कार्रवाई में विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल ने कथित तौर पर महत्वपूर्ण वित्तीय भूमिका निभाई और डिस्टिलरी तथा लाइसेंस धारकों से कमीशन इकट्ठा कर उसे अनवर ढेबर तक पहुंचाया। एजेंसी ने आरोपित अवैध कमाई के बराबर राशि की संपत्तियां अग्रवाल के परिवार के सदस्यों के नाम पर होने के आधार पर अटैच की हैं।
इसके अलावा, ED ने अनवर ढेबर से जुड़ी कई कथित बेनामी संपत्तियां भी अटैच की हैं। इनमें रायपुर स्थित ढेबर सिटी होम्स में प्लॉट और Shining Star Buildcon, Moonlight Real Estate, Swarn Infrabuild तथा Jai Gurudev Infrastructure जैसी कथित शेल कंपनियों के जरिए रखी गई जमीनें शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 30 करोड़ रुपये आंकी गई है।
दूसरी अटैचमेंट कार्रवाई में ED ने नॉर्थ गोवा के अंजुना स्थित Hotel Westinn Goa को निशाना बनाया। यह होटल Pacifica Hotels India Private Limited के नाम पर पंजीकृत है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं। ED का आरोप है कि करीब 110 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय से होटल खरीदा गया। एजेंसी के मुताबिक, इसके लिए कथित तौर पर शराब घोटाले से हासिल और बिना हिसाब के नकद पैसे का इस्तेमाल किया गया, जिसे चैतन्य बघेल के निर्देश पर पहुंचाया गया था।
तीसरी अटैचमेंट कार्रवाई में तीन FL-10A लाइसेंसधारी कंपनियों से जुड़े बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड जैसी वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं।
ये कंपनियां हैं—
ED के अनुसार, इन कंपनियों को कथित तौर पर अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया। एजेंसी के मुताबिक, इस तरह करीब 51 करोड़ रुपये की राशि सिंडिकेट तक पहुंचाई गई। इस मामले में ED ने रायपुर की विशेष PMLA अदालत में अपनी छठी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की है। इसमें चार नए आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं— विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि विजय भाटिया के पास Om Sai Beverages में कथित तौर पर 52.5 प्रतिशत बेनामी हिस्सेदारी थी और यह हिस्सेदारी दबाव के जरिए रखी गई थी। वहीं, प्रोबीर शर्मा पर घोटाले से जुड़ी बड़ी मात्रा में नकदी को कथित तौर पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में शामिल होने का आरोप है। ED की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से अर्जित संपत्तियों की जांच को आगे बढ़ाने के तौर पर देखी जा रही है।