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रोज एक गिलास फ्रूट जूस पीने से मूड हो सकता है बेहतर, छोटी स्टडी में सामने आई बात

रोज एक गिलास 100% फ्रूट जूस या स्मूदी पीने से शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी फायदा हो सकता है। ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी की एक छोटी स्टडी में पाया गया कि रोज जूस या स्मूदी पीने वाले लोगों में डिप्रेशन के लक्षण कम हुए। यह स्टडी ऐसे लोगों पर की गई, जो रोज बहुत कम फल और सब्जियां खाते थे। उन्हें अपनी डाइट में फल और सब्जियां बढ़ाकर रोजाना 5 हिस्से खाने के लिए कहा गया।

4 हफ्ते तक हुई स्टडी

इस रिसर्च में 42 लोगों को शामिल किया गया। स्टडी शुरू होने से पहले सभी लोग रोजाना दो या उससे कम फल और सब्जियां खाते थे। इन लोगों को तीन ग्रुप में बांटा गया। पहले ग्रुप के लोगों को अपनी पुरानी डाइट जारी रखने को कहा गया। दूसरे ग्रुप को सिर्फ फल और सब्जियां खाकर रोज 5 हिस्से पूरे करने के लिए कहा गया। तीसरे ग्रुप को भी फल और सब्जियां बढ़ाने के लिए कहा गया, लेकिन साथ में रोज एक गिलास 100% फ्रूट जूस या स्मूदी पीने को भी कहा गया। चार हफ्ते बाद दोनों ग्रुप के लोगों ने फल और सब्जियां ज्यादा खानी शुरू कर दीं। लेकिन जूस या स्मूदी पीने वाले लोगों में डिप्रेशन के स्कोर में ज्यादा कमी देखी गई।

डिप्रेशन के स्कोर में कमी

शोधकर्ताओं ने लोगों से कुछ सवाल पूछकर उनकी चिंता और डिप्रेशन की स्थिति की जांच की। जूस या स्मूदी पीने वाले ग्रुप का डिप्रेशन स्कोर दूसरे ग्रुप की तुलना में 2.52 अंक कम था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि यह बदलाव बहुत बड़ा नहीं था। साथ ही, स्टडी में सिर्फ 42 लोग शामिल थे और यह केवल 4 हफ्ते चली थी। इसलिए इस बारे में पक्की जानकारी के लिए बड़ी और लंबे समय तक चलने वाली रिसर्च की जरूरत है।

फाइबर भी बढ़ा

स्टडी के दौरान दोनों ग्रुप के लोगों ने फल और सब्जियां ज्यादा खाईं। इससे उनके शरीर में जाने वाला फाइबर करीब 8 से 10 ग्राम बढ़ गया।शोधकर्ताओं के मुताबिक, जूस या स्मूदी पीने वाले लोगों ने भी बाकी फल और सब्जियां खाना जारी रखा।

शरीर पर कोई नुकसान नहीं दिखा

फ्रूट जूस में चीनी होने की वजह से कई लोगों को चिंता रहती है। लेकिन इस 4 हफ्ते की स्टडी में जूस या स्मूदी पीने वाले लोगों की सेहत से जुड़े कुछ जरूरी टेस्ट में कोई नुकसान नहीं दिखा। शोधकर्ताओं का कहना है कि रोज एक छोटा गिलास 100% फ्रूट जूस या स्मूदी उन लोगों के लिए फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है, जिन्हें इन्हें रोज खाना मुश्किल लगता है। हालांकि, जूस को डिप्रेशन का इलाज नहीं माना जा सकता। इसके असर को समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।