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लिव-इन रिलेशनशिप पर दिल्ली HC की बड़ी टिप्पणी, ‘बालिगों को पार्टनर चुनने और साथ रहने का पूरा अधिकार’

दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अपनी मर्जी से साथ रहने वाले बालिगों को अपने पार्टनर चुनने और साथ रहने का पूरा अधिकार है। माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्त उनकी पसंद में दखल नहीं दे सकते और न ही उनकी जान या व्यक्तिगत आजादी के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने खतरे का सामना कर रहे एक लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि दो बालिगों का अपनी पसंद से साथ रहना, भले ही उनकी कानूनी शादी न हुई हो, उनके व्यक्तिगत अधिकारों का हिस्सा है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति अपनी जिंदगी और पार्टनर के बारे में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। परिवार या समाज उनकी पसंद से असहमत हो सकता है, लेकिन उन्हें धमकाने, परेशान करने या उनकी सुरक्षा और आजादी को नुकसान पहुंचाने का अधिकार किसी को नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि सामाजिक नैतिकता या किसी तरह के पूर्वाग्रह के आधार पर किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को कपल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बालिग जोड़े को अपनी पसंद से साथ रहने के कारण खतरा है, तो राज्य का कर्तव्य है कि वह उनकी जान और आजादी की रक्षा करे।