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मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रद्द करना '2+2=7' कहने जैसा, EC से मुलाक़ात के बाद बोले अभिषेक सिंघवी

New Delhi: कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने के रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फ़ैसले की तुलना "2+2=7" कहने से की। उन्होंने कहा कि यह आदेश कानूनी रूप से गलत है और कानून को पूरी तरह से गलत समझने पर आधारित है।

नई दिल्ली में चुनाव आयोग (EC) से कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने विस्तार से कानूनी तर्क पेश किए हैं जिनसे साबित होता है कि RO का आदेश "गलत" (perverse) है और 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of the People Act) के प्रावधानों के खिलाफ है।

सिंघवी ने कहा, "हमने उन्हें (EC) बताया है और साबित किया है - हमारे हिसाब से बिना किसी शक या विवाद के - कि RO ने एक गलत आदेश दिया है। यह आदेश वैसा ही है जैसे कोई 4 के बजाय 2+2=7 लिखे।" कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने - जिसमें केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला, विवेक तन्खा, दिग्विजय सिंह, भूपेश बघेल और मीनाक्षी नटराजन शामिल थे - चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलकर इस मामले में दखल देने की मांग की।

पार्टी का कानूनी पक्ष रखते हुए सिंघवी ने 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 33A का ज़िक्र किया। इस धारा के तहत जानकारी देना तभी ज़रूरी होता है जब अदालत ने औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हों और कथित अपराध के लिए दो साल से ज़्यादा की सज़ा का प्रावधान हो।

सिंघवी के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस मामले का हवाला दिया था, उसमें अभी संज्ञान (cognisance) लेने की नौबत भी नहीं आई थी, आरोप तय होने की बात तो दूर की है। उन्होंने कहा, "सुश्री नटराजन को सिर्फ़ अदालत के सामने पेश होने और यह बताने के लिए नोटिस मिला था कि मामले का संज्ञान क्यों नहीं लिया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि नोटिस संज्ञान लेने से पहले ही जारी कर दिया गया था। कानून की नज़र में, संज्ञान लिए बिना कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है।"

कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि नामांकन को उस चरण से बहुत पहले ही खारिज कर दिया गया, जिस पर कानून के तहत जानकारी का खुलासा करना ज़रूरी होता है। उन्होंने इस फैसले को "बेहद गलत, खुला उल्लंघन और साफ तौर पर गैर-कानूनी" बताया। उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके तुरंत सुधारात्मक राहत दे, न कि उम्मीदवारों को चुनाव प्रक्रिया के बाद लंबी कानूनी कार्यवाही करने के लिए मजबूर करे।

सिंघवी ने हरियाणा और गुजरात के उदाहरण भी दिए, जहां चुनाव आयोग ने नामांकन पत्रों को गलत तरीके से खारिज किए जाने के मामलों में दखल दिया था। कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं और उम्मीद जताई है कि मामले की जल्द जांच की जाएगी।

बैठक के बाद वेणुगोपाल ने कहा, "उन्होंने कहा है कि वे इस मामले को देखेंगे।" यह विवाद तब शुरू हुआ जब मंगलवार को मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है।