उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जसपुर में भाजपा काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल के आवास पर पहुंचकर उनकी माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री धामी ने राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान’ से जितेन ठाकुर को सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह 2025 उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर बुद्धिनाथ मिश्रा, श्याम सिंह कुटौला, प्रीतम सिंह, केसर सिंह रै और अताए साबिर अफजल मंगलोरी को ‘उत्तराखंड लाइफटाइम एक्सीलेंस इन लिटरेरी क्रिएशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने विभिन्न साहित्यिक क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लेखकों और ‘युवा कलमकार प्रतियोगिता’ के विजेताओं को भी सम्मानित किया। प्रो. दीवा भट्ट को साहित्य नारी वंदन सम्मान, प्रो. दिनेश चमोला को बाल साहित्य में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया, जबकि भूपेंद्र बिष्ट, सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को ‘उत्तराखंड मौलिक लेखन पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
कुमाऊंनी और गढ़वाली साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को भी सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य के प्रमुख साहित्यकारों को सम्मानित करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि जितेन ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा हैं।
उन्होंने सभी सम्मानित लोगों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी रचनाएं राज्य की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को समृद्ध कर रही हैं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ समारोह राज्य की साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक चेतना और लेखकों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है, जहां हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने अनगिनत साहित्यकारों और कवियों को प्रेरित किया है। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे महान साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और लेखक केवल शब्दों के सर्जक ही नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक भी होते हैं।