पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रही खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने ऐलान किया कि अब वह खुद टीएमसी की पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभालेंगी। ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पार्टी की मजबूती के लिए उन्होंने यह फैसला लिया है। साथ ही मदन मित्रा और कुणाल घोष को पार्टी की राज्य समिति में महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) नियुक्त किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और चुनाव आयोग के सामने पार्टी की अधिकृत प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी छोड़ दी है।
टीएमसी में विवाद उस समय और बढ़ गया, जब रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय पर नियंत्रण का दावा किया। इसके बाद उन्होंने पार्टी के लिए नया नेतृत्व ढांचा भी घोषित किया। बागी गुट ने अरूप रॉय को पार्टी का चेयरपर्सन बनाया और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) का गठन किया। इस समिति में फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष, सबीना यास्मीन, जावेद खान और संदीपन साहा सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी की मेंटर (मार्गदर्शक) बनी रहें। बागी गुट का दावा है कि उसे टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 टीएमसी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की है। टीएमसी में जारी इस सियासी संकट ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।