वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी अपनी बात रख रहे थे. भाजपा प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी वक्फ बिल पर अपनी बातें रख ही रहे थे, तभी विपक्षी सांसदों ने उनके बयान की आलोचना शुरू की. फिर सभापति से सुधांशु त्रिवेदी की बातों को एक्सपंज करने की मांग भी की गई. इसी दौरान कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह और अमित शाह में तकरार शुरू हो गई. दिग्विजय सिंह ने सुधांशु की बात पर आपत्ति जताई, जिसपर अमित शाह ने पलटवार किया.
वक्फ बिल पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- हमारी सरकार ने पहली बार मुस्लिम समाज के अंदर सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है. ताजमहल पर भी वक्फ ने दावा किया. तब सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा कि शाहजहां के समय का फरमान लेकर आइए जिसमें ताजमहल को वक्फ किया गया. अपने संबोधन के दौरान ही सुधांशु त्रिवेदी ने इशरत जहां, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी के नाम लिए और कहा कि ये लोग आज इनके साथ हैं. सुधांशु त्रिवेदी की इस बात पर एनसीपी (शरद पवार) की सांसद फौजिया खान ने आपत्ति की और एक्सपंज करने की मांग की. फौजिया खान ने कहा कि सुधांशु त्रिवेदी ने पूरे मुस्लिम समाज को अपमानित करने वाला बयान दिया है. इसे एक्सपंज किया जाए.
सुधांशु त्रिवेदी की बात पर अभी सभापति एनसीपी सांसद को समझा ही रहे थे कि गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया. अमित शाह ने कहा कि सुधांशु जी ने इंडी अलायंस को लेकर कहा है. उन्होंने कहा कि इशरत जहां, यही एनसीपी ने इशरत के घर जाकर इनाम भी दिया और शहीद बताया. दूसरा अतीक अहमद किस पार्टी से जुड़ा था? इंडी अलायंस. तीसरा मुख्तार अंसारी, ये भी इंडी अलायंस. ये सारे नाम आपके इंडी अलायंस से जुड़े हुए थे.
फिर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि याकूब मेमन के नमाज-ए-जनाजा में कितने लोग गए, कितने लोग अब्दुल कलाम के नमाज-ए-जनाजा में गए. एक सांसद तो ये कहते हैं कि अफजल की ज्यूडिशियल किलिंग हुई है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे लेकर जो कहा गया है, उसकी निंदा करता हूं. इस पर अमित शाह ने कहा कि माइक चालू करा दीजिए और दिग्विजय सिंह जी कह दें कि उन्होंने नहीं कहा है कि 26-11 हमले में संघ का हाथ था. सुधांशु त्रिवेदी ने रामप्रसाद बिस्मिल की पंक्तियों के साथ अपना भाषण खत्म किया. उन्होंने कहा- 'मुलाजिम हमको मत कहिए बड़ा अफसोस होता है अदालत की अदब से हम यहां तशरीफ लाए हैं पलट देते हैं हम मौजे-हवादिस अपनी जुर्रत से कि हमने आंधियों में भी चिराग अक्सर जलाए हैं.'