मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को निवेश और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में नोएडा के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। औद्योगिक गतिविधियों की बढ़ती मांग को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ‘न्यू नोएडा’ विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इस विस्तार से नए उद्योगों को जमीन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के अनुसार, न्यू नोएडा के विकास और औद्योगिक विस्तार से वर्ष 2030 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 से 6 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही आगामी पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में नोएडा अथॉरिटी के करीब 35 हजार करोड़ रुपये के 120 प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इन परियोजनाओं में डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
औद्योगिक विस्तार के लिए तैयार होगा न्यू नोएडा
वर्ष 1976 में दिल्ली के पास औद्योगिक नगरी के रूप में स्थापित नोएडा आज उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक और तकनीकी केंद्रों में शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से नजदीकी, बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक सुविधाओं के कारण यहां विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्यिक गतिविधियों में निवेश बढ़ा है।
प्राधिकरण के अनुसार, मौजूदा नोएडा क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता सीमित होने के कारण अब नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए न्यू नोएडा में चरणबद्ध तरीके से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं, मौजूदा नोएडा क्षेत्र में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सुविधा देने के लिए भी नीतिगत विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
न्यू नोएडा के विकसित होने से उद्योगों को अतिरिक्त जमीन और आधुनिक आधारभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे विनिर्माण, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
₹35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट होंगे शामिल
आगामी पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में नोएडा से जुड़े करीब 35 हजार करोड़ रुपये के 120 प्रोजेक्ट शामिल किए जाएंगे। इनमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
योगी सरकार की निवेश नीति के तहत निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने पर जोर दिया जा रहा है। नोएडा की ये परियोजनाएं औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करने में मदद कर सकती हैं।
तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से बेहतर होगी कनेक्टिविटी
न्यू नोएडा के विकास के साथ सार्वजनिक परिवहन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की भी योजना है। इसके लिए तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर पर काम किया जा रहा है। इनके माध्यम से नोएडा को बोड़ाकी के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब, बॉटनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते गौर सिटी से जोड़ने का प्रस्ताव है।
नोएडा पहले से ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से आवागमन को बेहतर बनाने और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र में नोएडा की मजबूत पहचान
प्राधिकरण के अनुसार, नोएडा 168 सेक्टरों में फैला है और इसका करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र विकसित हो चुका है। पिछले तीन दशकों में यहां लगभग 9,500 औद्योगिक, 5,000 वाणिज्यिक और 250 से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए हैं। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप पिछले 30 से 35 वर्षों में 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
नोएडा का उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में करीब 10 प्रतिशत योगदान बताया गया है। राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत, जबकि परिधान निर्यात में करीब 80 प्रतिशत है।
सैमसंग, डिक्सन, टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोबी जैसी प्रमुख कंपनियों की मौजूदगी ने नोएडा को औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाई है। डेटा सेंटर क्षेत्र में सिफी और अडानीकनेक्स के निवेश से भी यहां के तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूती मिली है।
सेमीकंडक्टर, एआई और बैटरी तकनीक पर भी जोर
नोएडा में अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बैटरी तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने से नई तकनीकों और उद्योगों के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं।
न्यू नोएडा के विकास का उद्देश्य केवल औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार करना नहीं, बल्कि निवेश को रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास से जोड़ना भी है। करीब 20 हजार हेक्टेयर में विकसित होने वाली यह योजना आने वाले वर्षों में नोएडा को विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और तकनीक के प्रमुख केंद्र के रूप में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।