उत्तर प्रदेश ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता जांच के मामले में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। योगी सरकार के प्रयासों से गांवों में फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) के जरिए पानी की जांच का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। 27 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश ने अपने वार्षिक लक्ष्य का 33.95 प्रतिशत हासिल कर लिया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 12.83 प्रतिशत है। इस अभियान से प्रदेश की करीब 4.85 लाख महिलाओं को रोजगार भी मिला है। ये महिलाएं गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
97 हजार से अधिक गांवों में जल जांच का लक्ष्य
यूपी जल निगम ग्रामीण के अनुसार, प्रदेश में कुल 97,071 गांव हैं। इन गांवों में जल गुणवत्ता जांच के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11,64,852 परीक्षण करने का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है।
27 अक्टूबर तक प्रदेश ने इस लक्ष्य का 33.95 प्रतिशत पूरा कर लिया है। फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से पानी की जांच कर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता का पता लगाया जा रहा है। इससे पानी से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान करने और जरूरी कदम उठाने में मदद मिल रही है।
जल गुणवत्ता जांच में पांच प्रमुख राज्यों की स्थिति
27 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, जल गुणवत्ता जांच में कर्नाटक 69.32 प्रतिशत उपलब्धि के साथ देश में पहले स्थान पर है। उत्तर प्रदेश 33.95 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है।
राज्यवार उपलब्धि इस प्रकार है:
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कर्नाटक – 69.32 प्रतिशत
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उत्तर प्रदेश – 33.95 प्रतिशत
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तमिलनाडु – 28.43 प्रतिशत
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आंध्र प्रदेश – 24.39 प्रतिशत
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असम – 7.30 प्रतिशत
इस सूची में यूपी का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत 12.83 प्रतिशत से काफी बेहतर है।
4.85 लाख महिलाओं को मिला रोजगार
योगी सरकार ने जल गुणवत्ता जांच अभियान को महिलाओं की भागीदारी से भी जोड़ा है। इसके तहत प्रत्येक राजस्व गांव में पांच महिलाओं को पानी की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रदेश की करीब 4.85 लाख महिलाएं केंद्र सरकार के WQMIS पोर्टल पर फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से जल परीक्षण के लिए पंजीकृत हैं। इससे उन्हें गांवों में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी को मजबूत बनाना है।