Breaking News

विपक्ष के हंगामे के बीच पेपर लीक के खिलाफ लोकसभा में जितेंद्र सिंह ने बिल पेश किया     |   लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित     |   संसद के बाहर धर्मेंद्र प्रधान का NDA सांसदों ने किया स्वागत, पाग पहना कर ले गए अंदर     |   कांग्रेस के बिना PM मोदी सांस भी नहीं ले सकते: पवन खेड़ा     |   जंतर मंतर प्रदर्शन के दौरान पर छात्रों पर लाठीचार्ज मामले पर SC में कल होगी सुनवाई     |  

दुनिया का वो देश, जिसे कहते हैं 'Mini India'

आज भारतीय दुनिया के लगभग हर हिस्से में अपनी पहचान बना चुके हैं. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, खाड़ी देशों से लेकर अफ्रीका तक शायद ही कोई ऐसा देश होगा, जहां भारतीय न रहते हों. कहीं वो बड़े कारोबारी हैं, कहीं वैज्ञानिक, डॉक्टर और इंजीनियर, तो कहीं पीढ़ियों से बसकर उस देश की संस्कृति का हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जहां भारतीयों की मौजूदगी इतनी ज्यादा है कि उसे ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है. यहां की गलियों में हिंदी सुनाई देती है, भारतीय त्योहार पूरे उत्साह से मनाए जाते हैं और मंदिरों की घंटियां भी उसी तरह गूंजती हैं, जैसे भारत में. यह देश है फिजी (Fiji), जो हजारों किलोमीटर दूर होने के बावजूद भी अपने भारतीय संस्कृति के लिए जाना जाता है.

दक्षिण प्रशांत महासागर के मेलानेशिया क्षेत्र में स्थित फिजी एक खूबसूरत द्वीपीय देश है. यहां की कुल आबादी का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है. यही वजह है कि यहां हिंदी को भी आधिकारिक भाषाओं में शामिल किया गया है. हालांकि यहां बोली जाने वाली हिंदी समय के साथ बदलकर फिजी हिंदी या अवधी आधारित स्थानीय रूप में विकसित हो चुकी है.

फिजी में भारतीयों का इतिहास करीब डेढ़ सौ साल पुराना है. साल 1874 में ब्रिटेन ने फिजी को अपने कब्जे में लेकर इसे कॉलोनी बना लिया. इसके बाद अंग्रेजों ने भारत से हजारों मजदूरों को पांच साल के अनुबंध पर गन्ने के खेतों में काम करने के लिए फिजी भेजा. मजदूरों से कहा गया था कि अनुबंध पूरा होने के बाद वो चाहें तो अपने खर्च पर भारत लौट सकते हैं या फिर कुछ और साल काम करने के बाद ब्रिटिश जहाज उन्हें वापस भारत पहुंचा देंगे. लेकिन हालात ऐसे बने कि ज्यादातर लोग कभी अपने देश यानी भारत लौट ही नहीं पाए. उन्होंने फिजी को ही अपना नया घर बना लिया. बाद में 1920 और 1930 के दशक में भी बड़ी संख्या में भारतीय अपनी इच्छा से फिजी जाकर बस गए. धीरे-धीरे वहां भारतीय समाज मजबूत होता चला गया और फिजी को “मिनी इंडिया” कहा जाने लगा

फिजी कोई एक द्वीप नहीं, बल्कि 322 द्वीपों का समूह है. इनमें से केवल 106 द्वीपों पर स्थायी आबादी रहती है. सबसे बड़े और प्रमुख द्वीप विती लेवु और वनुआ लेवु हैं, जहां देश की करीब 87 प्रतिशत आबादी रहती है. इन द्वीपों की खास बात यह है कि इनका निर्माण करोड़ों साल पहले ज्वालामुखीय एक्टिविटी से हुआ था. आज भी यहां कुछ सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं. हरे-भरे जंगल, नीला समुद्र और खूबसूरत समुद्री तट फिजी को दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं. फिजी प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है. यहां घने जंगल, खनिज संपदा और समुद्री संसाधन बड़ी मात्रा में मौजूद हैं. देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और चीनी उद्योग पर आधारित है. हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटक यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखने पहुंचते हैं. यही पर्यटन फिजी की सबसे बड़ी विदेशी मुद्रा आय का स्रोत भी माने जाते है.

फिजी में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी होने के कारण यहां भारतीय संस्कृति आज भी जीवित है. यहां रामनवमी, होली, दिवाली, जन्माष्टमी और नवरात्रि जैसे त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं. फिजी के नादी शहर में स्थित श्री शिव सुब्रमन्या हिंदू मंदिर देश का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध हिंदू मंदिर माना जाता है. इसकी दक्षिण भारतीय शैली की वास्तुकला दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है.

फिजी में इंसानों की मौजूदगी करीब 1000 ईसा पूर्व से रही है. हालांकि उस समय यहां रहने वाले लोगों के बारे में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. इतिहास में यह भी लिखा मिलता है कि प्राचीन समय में यहां रहने वाली कुछ जनजातियों को नरभक्षी माना जाता था. कहा जाता है कि वो सामान्य लोगों का नहीं, बल्कि युद्ध में मारे गए दुश्मनों का मांस खाते थे. समय के साथ यह परंपरा पूरी तरह समाप्त हो गई और आज फिजी एक शांतिपूर्ण, मार्डन और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध देश बन चुका है.

आज फिजी उन देशों में गिना जाता है, जहां भारतीय संस्कृति सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देती है. यहां हिंदी बोली जाती है, भारतीय परंपराएं निभाई जाती हैं और त्योहार उसी उत्साह से मनाए जाते हैं, जैसे भारत में. यही वजह है कि हजारों किलोमीटर दूर होने के बावजूद फिजी आज भी दुनिया भर के भारतीयों के लिए ‘मिनी इंडिया’ के नाम से जाना जाता है.