तेलंगाना की सत्ता पर काबिज होने के बाद कांग्रेस की नजर राज्य में 2024 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की ही नहीं बल्कि सियासी तौर पर दक्षिण में खुद को और मजबूत करने की है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए रेवंत रेड्डी पार्टी के मिशन को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा की गई ‘छह गारंटी’ और दिव्यांग महिलाओं को नौकरी देने के वादे को अमीलजामा पहनाने की मंजूरी दे दी गई है. तेलंगाना की जनता से सीधे जुड़ने के लिए मुख्यमंत्री शुक्रवार से ‘प्रजा दरबार’ शुरू कर रहे हैं. इसके अलावा रेवंत ने जिस तरह से ‘प्रगति भवन’का नाम बदलकर ‘ज्योतिराव फुले प्रजा भवन’ किया है, उसके पीछे भी सियासी मकसद छिपा हुआ है.
देश के पांच राज्यों में हुए चुनावों में तेलंगाना की जीत कांग्रेस के लिए उम्मीद की एक किरण की तरह है, क्योंकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है तो मध्य प्रदेश में जीत की उम्मीदों पर पानी फिरा तो मिजोरम में सीटें घट गईं. 2024 के सेमीफाइनल माने जाने वाले 5 राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के हाथ सिर्फ तेलंगाना की सत्ता लगी है. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिहाज से देखें तो तेलंगाना की जीत कांग्रेस के लिए बेहद अहम है. सरल शब्दों में कहें तो तेलंगाना की जीत किसी जादू से कम नहीं है.