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इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस योजना पर संसदीय समिति सख्त, शिक्षा मंत्रालय से मांगा योजना का रोडमैप

संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IoE) योजना को लेकर चिंता जताई है। समिति ने कहा कि योजना शुरू हुए 8 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक 20 में से सिर्फ 12 संस्थानों को ही यह दर्जा मिला है। समिति ने शिक्षा मंत्रालय से कहा है कि बाकी 8 संस्थानों को जल्द इस योजना में शामिल करने के लिए समयबद्ध योजना (रोडमैप) बनाई जाए।

समिति ने यह भी कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी इस योजना में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। समिति के अनुसार, JNU सामाजिक विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। केंद्र सरकार ने 2017 में यह योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य 10 सरकारी और 10 निजी, यानी कुल 20 विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध संस्थान बनाना है।

इस योजना के तहत चुने गए संस्थानों को पढ़ाई, प्रशासन और वित्तीय फैसले लेने में ज्यादा स्वायत्तता दी जाती है। सरकारी संस्थानों को आर्थिक सहायता भी मिलती है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि किसी भी संस्थान को IoE का दर्जा देने के लिए एक तय प्रक्रिया अपनाई जाती है। पहले विशेषज्ञ समिति आवेदन की जांच करती है, फिर UGC सिफारिश भेजता है और उसके बाद मंत्रालय अंतिम मंजूरी देता है।

हालांकि, संसदीय समिति इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। समिति का कहना है कि मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि 8 साल बाद भी योजना पूरी क्यों नहीं हो पाई। समिति ने मंत्रालय से कहा है कि वह जल्द से जल्द बाकी संस्थानों को शामिल करने की योजना बनाए और JNU जैसे अन्य विश्वस्तरीय भारतीय संस्थानों को भी इस योजना में शामिल करने की संभावना पर विचार करे।