Breaking News

राजकोट में इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, दुबई से आ रही थी मुंबई, सभी यात्री सुरक्षित     |   अंकित हत्याकांड: दिल्ली की कोर्ट दोषी ताहिर हुसैन की सजा पर 31 जुलाई को फैसला सुनाएगी     |   'पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस जानबूझकर संसद में हंगामा कर रही', बोले किरेन रिजिजू     |   गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में BAMS एग्जाम से पहले पेपर लीक की आशंका, जांच जारी     |   दिल्ली मालवीय नगर होटल फायर केस: साकेत कोर्ट ने कुक केसर नेगी को जमानत दी     |  

हिमाचल में भारी बारिश से 1,000 करोड़ तक का नुकसान, सरकार ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को लोगों और पर्यटकों से अपील की कि मानसून के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का सख्ती से पालन करें। राज्य में लगातार बारिश के कारण बादल फटने, अचानक बाढ़ आने, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) और पूरी आपदा प्रबंधन व्यवस्था 24 घंटे काम कर रही है। इसका उद्देश्य जानमाल के नुकसान को कम करना और आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि इस मानसून में कई दुखद घटनाएं हुई हैं। इनमें एक घटना में 13 लोगों की जान चली गई, जो यात्रा कर रहे थे और आपदा की चपेट में आ गए। कांगड़ा समेत राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें लोगों की जान और संपत्ति का नुकसान हुआ है। राणा के अनुसार, अब तक हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की 9 घटनाएं और करीब 19 फ्लैश फ्लड की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, 4 प्रमुख स्थान बादल फटने से प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 120 से ज्यादा सड़कें प्रभावित हैं। कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति की योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।

उन्होंने बताया कि मौजूदा मानसून सीजन में अब तक करीब 15 से 16 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता जानमाल के नुकसान को कम करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा न करें और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें।

राणा ने कहा कि बारिश से हुए नुकसान का व्यापक आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों को नुकसान का सही आकलन करने और पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक, मानसून के कारण हिमाचल प्रदेश में करीब 800 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है। विस्तृत आकलन के बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF), केंद्र सरकार की सहायता और अन्य उपलब्ध माध्यमों से आर्थिक मदद मांगी जाएगी।

विशेष सचिव ने बताया कि SDRF की टीमें और जिला प्रशासन समेत सभी आपदा राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य और जिला स्तर के आपातकालीन संचालन केंद्र 24 घंटे काम कर रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि जब भी किसी घटना की सूचना मिलती है, तुरंत कार्रवाई की जाती है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तेजी से राहत और बचाव कार्य शुरू करें, संबंधित जिलाधिकारियों को जानकारी दें और प्रभावित लोगों को बिना देरी के हर संभव मदद उपलब्ध कराएं। राज्य सरकार ने लोगों से भारी बारिश के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को नदियों, नालों और भूस्खलन वाले इलाकों के पास जाने से बचने और मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारी व आपदा संबंधी एडवाइजरी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।