भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में बिहार ने ‘फोकस स्टेट पार्टनर’ के रूप में अपने ऊर्जा क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव और भविष्य की योजनाओं को मजबूती से पेश किया। यशोभूमि (इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर) के गुलमोहर हॉल में आयोजित “Powering Bihar’s Growth: Innovation, Inclusion & Investment” सत्र में राज्य की ऊर्जा नीतियों, उपलब्धियों और निवेश संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
सत्र को संबोधित करते हुए ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के बिजली क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय और संचालन स्तर पर उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में ₹342 करोड़ के घाटे में चल रही ट्रांसमिशन यूटिलिटी अब वित्त वर्ष 2025 में ₹2,004 करोड़ के मुनाफे में पहुंच चुकी है।

उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में बिजली की मांग और आपूर्ति दोनों में तेजी से वृद्धि हुई है। राज्य ने 8,700 मेगावाट से अधिक की अधिकतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो प्रदेश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। वितरण क्षेत्र में सुधार के चलते AT&C हानियां घटकर लगभग 15.5% रह गई हैं, जिससे राजस्व संग्रह में भी सुधार हुआ है।
डिजिटल क्षेत्र में भी बिहार ने बड़ी प्रगति की है। अब तक राज्य में 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग पर बेहतर नियंत्रण मिला है। शेष 2.5 लाख मीटर जल्द लगाने का लक्ष्य रखा गया है। भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि बिहार ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण क्षेत्र में अगले पांच वर्षों में ₹81,000 करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने की योजना है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा में ऊर्जा क्षेत्र के कई प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बिहार में निवेश की संभावनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। अंत में, ऊर्जा सचिव ने भरोसा दिलाया कि राज्य की नीतियां सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हैं, जिससे निवेशकों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी हो रही है।