Breaking News

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले- पहले राहुल जी को सुनें, उसके बाद ही प्रधानमंत्री को बोलने देंगे     |   बेंगलुरु मेट्रो में किराए को लेकर हुई बढ़ोतरी 9 फरवरी से लागू होगी     |   पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अभी भी ट्रैफिक जाम     |   दिल्ली: सिख फ़ॉर जस्टिस के आतंकी पन्नू के स्लीपर सेल के दो गुर्गे गिरफ्तार     |   इजरायल ने गाजा ब्रिगेड के कमांडर अल-हबील का किया काम तमाम, हमास में मची खलबली     |  

SIR को लेकर मानसिक तनाव ने 110 लोगों की जान ली, सीएम ममता बनर्जी ने किया दावा

West Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को दावा किया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मानसिक तनाव और दहशत के कारण अब तक कम से कम 110 लोगों की मौत हो चुकी है।

उन्होंने 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि उनकी नयी पुस्तक का इस मेले में विमोचन होगा। ये पुस्तक एसआईआर के कारण लोगों को झेलनी पड़ रही पीड़ा पर आधारित 26 कविताओं का संकलन है।

बनर्जी ने कहा कि बुजुर्ग समेत सैकड़ों लोगों को सुनवाई के लिए एसआईआर शिविरों में कतार में खड़ा होना पड़ रहा है और प्रतिदिन पांच-छह घंटे खुले में इंतजार करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘तार्किक विसंगतियों के नाम पर वे (निर्वाचन आयोग) बंगालियों के उपनाम को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, जो (उपनाम) सालों से ज्ञात और स्वीकृत हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ममता बनर्जी और ममता बंद्योपाध्याय, दोनों नाम से जाना जाता है। उसी तरह चटर्जी और चट्टोपाध्याय एक ही उपनाम हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान ठाकुर को टैगोर नाम से भी जाना जाने लगा।’’ बनर्जी ने कहा कि अगर रवींद्रनाथ टैगोर जीवित होते, तो शायद उन्हें भी आज इस स्थिति का सामना करना पड़ता।

उन्होंने दावा किया कि दो या दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता से उनकी उम्र में अंतराल के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है और बुजुर्ग लोगों से जन्म प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी माताएं हमें सटीक जन्मतिथि नहीं बता सकतीं। यहां तक कि (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी) वाजपेयी जी ने भी मुझे बताया था कि 25 दिसंबर उनकी असली जन्मतिथि नहीं है। मेरे पास माध्यमिक (कक्षा 10 की राज्य बोर्ड परीक्षा) के प्रमाण पत्र हैं, जिनसे मेरी जन्मतिथि प्रमाणित होती है। लेकिन पुरानी पीढ़ियों के कई ऐसे लोग हैं जिनके पास शायद ये कागजात न हों। उन्हें क्यों परेशान किया जाए?’’