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नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यायनी की विशेष पूजा-अर्चना

Navratri: नवरात्रि उत्सव के छठे दिन पूजा-अर्चना के लिए उत्तर भारत के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। ये दिन देवी दुर्गा के मां कात्यायनी रूप को समर्पित है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनवांछित फल मिलता है।

उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में, आत्म वीरेश्वर मंदिर के परिसर में स्थित प्राचीन कात्यायनी मंदिर में भक्ति का सागर उमड़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मीरजापुर में इलाके के मंदिर धार्मिक मंत्रों से गूंज रहे हैं। श्रद्धालु इस मौके पर विशेष प्रसाद चढ़ा रहे हैं। जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में देश भर से श्रद्धालु माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।

हाल ही में यात्रा मार्ग पर बादल फटने और भूस्खलन की वजह से करीब तीन हफ्ते तक स्थगित रहने के बाद दोबारा शुरू हुई तीर्थयात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कटरा लौटने लगे हैं।

जम्मू के बावे वाली माता महाकाली मंदिर में शनिवार तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं, इस मौके पर मंदिर में खास तौर से सजावट की गई है।

नौ दिनों के नवरात्रि उत्सव के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, यह उत्सव दो अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा के दिन खत्म होगा।

श्रद्धालुओ नवरात्रि के दिन माता रानी के छठवें दिन ऋषि की पुत्री माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनका मान्यता ये है कि जिनकी शादी नहीं होती कुंवारी कन्या, बालक की शादी विवाह नहीं होता है तो माता को दही और हल्दी मंगलवार के दिन लगाने से शीघ्र से शीघ्र शादी विवाह हो जाता है।”

आज के दिन देवी जी की शक्ति हम लोगों को प्राप्त होती है। हम लोग दर्शन करते हैं तो हम लोगों का व्रत रहता है नौ दिन, तो बहुत ही अंदर हल्कापन महसूस होता है। मतलब इसके लिए तो हम कुछ कह ही नहीं सकते हैं। देवी मां के आगे जो देवी मां करतीं हैं सब काम पूरे कर देती है फटाफट।”