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बालमुकुंद आचार्य का संदेश: आश्रमों से निकलकर सनातन धर्म और संस्कृति का प्रचार करें

29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन भक्ति भाव के साथ किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से अनेक साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद”। इस विषय पर सभी संतों ने अपने विचार रखते हुए समाज में एकता, समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।

इस अवसर पर श्री बालमुकुंद आचार्य भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में महाराज ने कहा कि पूरी दुनिया में फादर और चादर फैल गए हैं। अब हम इस बात का इंतजार करें कि जैसे मिसाइलें चलेंगी और सब अपने आप ठीक हो जाएगा—ऐसा नहीं है। यह तो 1200 साल से चलता आ रहा है। 1200 साल का संघर्ष हम सबको पता है, हम लगातार लड़ ही रहे हैं, लेकिन हुआ क्या है—हम सिमटते जा रहे हैं, छोटे होते जा रहे हैं, एक कोने में खड़े, डरे और सहमे हुए हैं।

अब हम सबको मिलकर देश और दुनिया में अपने-अपने आश्रमों और मठों से निकलकर राष्ट्र के साथ-साथ अपने आध्यात्म, धर्म, संस्कृति और परंपराओं को ले जाने की आवश्यकता है और लोगों को जोड़ने की आवश्यकता है। हमारी परंपराएं सबसे खूबसूरत हैं और उनसे जुड़ने के बाद व्यक्ति अपने आप को बहुत आनंदित महसूस करता है।

इसका जीता-जागता प्रमाण कई संस्थाएं हैं, जैसे इस्कॉन, जो धीरे-धीरे लोगों को जोड़ने का काम कर रही हैं। तो हम सबको भी मिलकर यह काम करना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर इस दिशा में कार्य करना चाहिए और अपनी संस्कृति, धर्म और परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।