पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी की पुण्यतिथि पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने प्रणब मुखर्जी को एक कुशल प्रशासक और विद्वान बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में देश और संविधान के मूल्यों के प्रति हमेशा पूरी निष्ठा दिखाई। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि प्रणब दा की विरासत आज भी नई पीढ़ी के नेताओं को प्रेरणा देती है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने प्रणब मुखर्जी को देश के महान राजनेताओं, विद्वानों और बेहतरीन सांसदों में से एक बताया। अधिकारी ने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने पांच दशक से ज्यादा समय तक देश की सेवा की। उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले और राष्ट्रपति के रूप में भी देश की सेवा की। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति थे। उन्होंने 25 जुलाई 2012 से 25 जुलाई 2017 तक राष्ट्रपति पद संभाला। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने केंद्र सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे वित्त, रक्षा, विदेश और वाणिज्य मंत्री रह चुके थे। प्रणब मुखर्जी पहली बार 1969 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2004 में वे लोकसभा पहुंचे और दो बार सांसद रहे। वे करीब 23 साल तक कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य भी रहे।
2004 से 2012 के बीच उन्होंने 95 से ज्यादा मंत्रियों के समूहों की अध्यक्षता की। इन समूहों ने प्रशासनिक सुधार, सूचना का अधिकार, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, UIDAI और मेट्रो रेल जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया। उन्होंने ग्रामीण बैंकों, EXIM Bank और NABARD जैसी संस्थाओं की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पहले प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने कहा था कि अलग-अलग विचारों को साथ लाकर राष्ट्रीय मुद्दों पर सहमति बनाना प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक जीवन की बड़ी खासियत थी। प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिराती गांव में हुआ था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने कॉलेज शिक्षक और पत्रकार के तौर पर काम किया। उन्हें 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। प्रणब मुखर्जी का 31 अगस्त 2020 को 84 साल की उम्र में निधन हो गया था।