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अमेरिका में नई तेल रिफाइनरी में निवेश करेगी रिलायंस इंडस्ट्रीज: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका में 50 वर्ष में स्थापित की जा रही पहली नई तेल रिफाइनरी के निर्माण में भागीदार होगी। उन्होंने इसे ‘‘अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी’’ रिफाइनरी बताया है। इस परियोजना का संचालन कर रही कंपनी अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग (एएफआर) के अनुसार, नई रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउनस्विले में स्थित होगी और इसे पूरी तरह से अमेरिकी ‘शेल’ तेल पर चलने के लिए तैयार किया जाएगा।

रिलायंस ने रिफाइनरी में उत्पादित ईंधन खरीदने के लिए 20 साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना की शुरुआत 2026 की दूसरी तिमाही में होने की संभावना है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर मंगलवार को एक संदेश में इसे ‘‘300 अरब अमेरिकी डॉलर का ऐतिहासिक समझौता’’ बताते हुए कहा कि यह परियोजना उनके प्रशासन के ‘‘अमेरिका फर्स्ट एजेंडा’’ के कारण संभव हो रही है। रिलायंस की ओर से इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

रिफाइनरी का निर्माण पूरा होने पर 1977 में चालू हुई मैराथन की गैरीविले रिफाइनरी (लुइसियाना) के बाद यह अमेरिका में पहली नई बड़ी शोधन इकाई होगी। ट्रंप और एएफआर दोनों ने ही परियोजना के वित्तीय विवरण या इसके पूरा होने की समयसीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

यह रिलायंस द्वारा अमेरिका में निर्मित की जाने वाली पहली तेल रिफाइनरी होगी। रिलायंस गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसर का संचालन करती है जिसकी कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता 12 लाख बैरल है।

‘अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग’ ने रिलायंस के नाम का उल्लेख किए बिना कहा कि ‘‘ उसने उसी वैश्विक ऊर्जा कंपनी के साथ 20 वर्ष के लिए बाध्यकारी आपूर्ति समझौते का प्रारूप भी तैयार किया है, जिसके तहत अमेरिका में उत्पादित ऊर्जा, जो पूरी तरह ‘अमेरिकी शेल’ तेल से प्राप्त होगी...की खरीद, प्रसंस्करण और वितरण के लिए प्रतिबद्धता सुनिश्चित की गई है।’’

बयान में कहा गया कि नए समझौते के तहत 125 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 1.2 अरब बैरल अमेरिकी हल्के ‘शेल’ तेल की खरीद एवं प्रसंस्करण किया जाएगा। साथ ही, एएफआर 175 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 50 अरब गैलन परिष्कृत उत्पादों का उत्पादन करेगा।

इसमें कहा गया, ‘‘अमेरिका का व्यापार असंतुलन 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक सुधरेगा।’’ गौरतलब है कि फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां अंबानी की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश कर चुकी हैं जबकि जनरल अटलांटिक जैसे अमेरिकी निवेशकों ने रिलायंस रिटेल वेंचर्स में अल्पसंख्यक हिस्सेदारी हासिल की है।