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अमित शाह की मौजूदगी में हुआ असम-नागालैंड समझौता, ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बूस्ट

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते को पूर्वोत्तर भारत में शांति, विकास और ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता है, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में दशकों से चले आ रहे एक बड़े विवाद का समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद असम और नागालैंड की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज का रास्ता साफ हो गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सहमति का रास्ता चुना है। उनके मुताबिक यह समझौता भारत की एकता और सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण है। शाह ने विश्वास जताया कि इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। अमित शाह ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में शांति और स्थिरता का माहौल मजबूत हुआ है। इसी का परिणाम है कि क्षेत्र में पर्यटन और निजी निवेश लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक शांति के कारण निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ा है और विकास परियोजनाओं को गति मिली है।

इस समझौते के बाद सीमा क्षेत्रों में ऊर्जा संसाधनों के दोहन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि तेल और गैस की खोज से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। गृह मंत्री ने संकेत दिया कि पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रिया मजबूत होने के साथ-साथ सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को हटाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को विकास और समृद्धि के नए दौर में ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह समझौता न केवल लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत को ऊर्जा, निवेश और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने वाला कदम भी माना जा रहा है।