महमूद मदनी ने संविधान और कुरान शरीफ में सर्वोपरी क्या, के सवाल पर कहा, “ये सवाल ही गलत है. दोनों के बीच किसी तरह का कोई कंपटिशन ही नहीं है. इनके बीच कोई मुकाबला ही नहीं है.” उन्होंने आगे कहा कि ये सवाल मुझसे साल 2002 से ही पूछा जा रहा है. कभी राष्ट्र के नाम पर, कभी देश के नाम पर ये सवाल ही गलत है.”
मदनी ने आगे कहा, “कुरान और शरीयत हमारे मां-बाप की तरह है. आप मुझसे पूछेंगे कि कौन सी आंख अच्छी लगती है, कौन सी रखें और कौन सी फोड़ दें. यह हमारे लिए हमारा आइन है.” उन्होंने आगे कहा, “मेरे हिसाब से भारत के संविधान की अपनी जगह है. और कुरान शरीफ की अपनी जगह है. दोनों को आप मिक्स मत करिए. आज के युवाओं को यह पता होना चाहिए कि कुरान का क्या काम है, कुरान की क्या हैसियत है. कुरान का क्या मुकाम है.”