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क्या है 'चिल्लई कलां'? जो बनती है 40 दिन तक कड़ाके की ठंड की वजह?

Jammu and Kashmir: 20 दिसंबर, 2024 को कश्मीर घाटी में पांच दशक की सबसे सर्द रात दर्ज की गई। हाड़ कंपा देने वाली ठंड में न्यूनतम तापमान शून्य से साढ़े आठ डिग्री नीचे चला गया था। ये 1974 के बाद श्रीनगर में दिसंबर की सबसे ठंडी रात थी। 1974 में श्रीनगर का न्यूनतम तापमान शून्य से 10.3 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया था। 1891 के बाद ये तीसरी सबसे ठंडी रात थी। ये तापमान चिल्लई कलां की अवधि शुरू होने के ठीक एक दिन पहले का था। चिल्लई कलां हर साल 40 दिन की अवधि होती है, जब कश्मीर घाटी में कड़ाके की ठंड पड़ती है।

चिल्लई कलां के दौरान न्यूनतम तापमान अमूमन शून्य से नीचे होता है। इस दौरान लगातार बर्फबारी होती है, जिससे ग्लेशियरों और जलाशयों में बर्फ की मात्रा बढ़ जाती है। जलाशय गर्मियों में पानी का अहम स्रोत होते हैं। 

स्थानीय भाषा में बोली जाने वाली 'चिल्लई कलां' का मतलब कड़ाके की ठंड होती है। इसके बाद 20 दिन की अवधि 'चिल्लई खुर्द ' कहलाती है, जब तापमान थोड़ा कम होता है। अंत में 'चिल्लई बच्चा' का दौर आता है, जब सर्दी और कम हो जाती है।