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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: चुनावी मैदान में BJP के प्रमुख नेताओं की सूची

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी को चुनौती देने के लिए बीजेपी जोरशोर से तैयारियों में जुटी है। सुवेंदु अधिकारी जैसे कई नेता चुनावी अभियान को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2011 विधानसभा चुनावों में मात्र चार प्रतिशत वोट हासिल करने से लेकर 2021 में 38 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल करके बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ काफी मजबूत की है। राज्य में पार्टी के 12 लोकसभा सांसद और 65 से ज्यादा विधायक हैं।

चुनाव लड़ने वाले पार्टी के कुछ प्रमुख चेहरे इस प्रकार हैं:

1. सुवेंदु अधिकारी:

विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी राज्य में बीेजेपी के सबसे प्रमुख नेताओं में एक हैं और आगामी चुनावों में उनकी केंद्रीय भूमिका रहने की उम्मीद है। वे टीएमसी के पूर्व नेता हैं, जो 2021 के चुनावों से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर सुर्खियां बटोरीं। नंदीग्राम उस चुनाव के सबसे चर्चित मुकाबलों में एक था। मेदिनीपुर के राजनीतिक रूप से प्रभावशाली अधिकारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले अधिकारी का तटीय जिलों और 'जंगल महल' इलाके में मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क है।

आक्रामक प्रचार शैली के लिए मशहूर अधिकारी, दक्षिण बंगाल में बीजेपी की पकड़ मजबूत करने के प्रयासों में अग्रणी रहे हैं। पार्टी में उन्हें बंगाल की राजनीति के मामले में प्रमुख रणनीतिकार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माना जाता है। राज्य में एक और कड़े मुकाबले वाले चुनाव की ओर बढ़ते हुए, अधिकारी से बीजेपी के अभियान का नेतृत्व करने, भ्रष्टाचार, शासन की विफलताओं और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है।

बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए उनका राजनीतिक प्रभाव, जमीनी नेटवर्क और जुझारू बयानबाजी उन्हें पार्टी का प्रमुख फील्ड कमांडर बनाती है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को पश्चिम बंगाल में पार्टी के संगठनात्मक आधार को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं में गिना जाता है।

आरएसएस के पूर्व प्रचारक, घोष ने 2015 से 2021 के बीच राज्य में बीजेपी के विकास का नेतृत्व किया। नतीजा निकला कि पार्टी ने 2019 में 18 लोकसभा सीटें जीतीं। वे उसी चुनाव में मेदिनीपुर से सांसद चुने गए। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनावों के बाद उनके राजनीतिक करियर में चुनौतियां आईं, जब मेदिनीपुर से बर्धमान-दुर्गापुर में स्थानांतरित होने के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में लिए गए संगठनात्मक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी, जिससे राज्य इकाई के भीतर के आंतरिक मुद्दे उजागर हुए थे।

ये तनाव तब और साफ हो गया जब घोष अपनी नवविवाहित पत्नी के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निमंत्रण पर दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस घटना की पार्टी के कुछ वर्गों ने आलोचना की। 2025 में सामिक भट्टाचार्य के राज्य बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद, घोष जैसे नेता, जो पिछले कुछ सालों से हाशिये पर थे, एक बार फिर प्रमुखता हासिल करने लगे। बीजेपी नेता विधानसभा चुनावों की तैयारी में उनकी संगठनात्मक क्षमता और जमीनी स्तर पर जुड़ाव को महत्वपूर्ण मानते हैं।

2. शंकर घोष:

सिलीगुड़ी विधायक शंकर घोष को उत्तर बंगाल में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में एक माना जाता है। उन्होंने विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में काम किया है और वे अपने वाक्पटुता, विधायी जानकारी और संगठनात्मक समन्वय के लिए जाने जाते हैं। पूर्व सीपीआई (एम) नेता, 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी में शामिल हुए और सिलीगुड़ी निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी उम्मीदवार ओम प्रकाश मिश्रा को 35,000 से ज्यादा वोटों से हराया। सूक्ष्मजीवविज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त घोष, खास कर उत्तर बंगाल में विकास और शासन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

3. अग्निमित्रा पॉल

आसनसोल दक्षिण विधानसभा से बीजेपी की विधायक अग्निमित्रा पॉल राज्य में पार्टी की प्रमुख महिला नेताओं में एक हैं। राजनीति में आने से पहले वे फैशन डिजाइनर थीं। उन्होंने 2019 में बीजेपी ज्वाइन की और राज्य महिला मोर्चा की अध्यक्ष और महासचिव सहित कई संगठनात्मक पदों पर आसीन रहीं। अभी वे राज्य इकाई की उपाध्यक्ष हैं। पॉल ने 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी उम्मीदवार सायनी घोष को हराया, लेकिन 2022 के आसनसोल लोकसभा उपचुनाव और 2024 के मेदिनीपुर से हुए आम चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे विधानसभा के अंदर और बाहर कथित भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और शासन से संबंधित मुद्दों को उठाने में सक्रिय रही हैं।

4. रेखा पात्रा 

संदेशखाली विरोध प्रदर्शनों के दौरान रेखा पात्रा बीजेपी का जाना-पहचाना चेहरा बनकर उभरीं। पार्टी ने इन प्रदर्शनों को महिलाओं के खिलाफ कथित अत्याचारों और स्थानीय शासन की विफलताओं के मुद्दे के रूप में उजागर करने का प्रयास किया था। गृहिणी पात्रा, टीएमसी के कद्दावर नेता शेख शाहजहाँ के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान सुर्खियों में आईं। बीजेपी ने उन्हें एक पीड़ित के रूप में पेश किया, जो स्थानीय स्तर पर कुशासन के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज बन गईं। बीजेपी ने 2024 में पात्रा को बसीरहाट लोकसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया। पार्टी ने इस मुद्दे पर आक्रामक प्रचार किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'शक्ति स्वरूप' यानी नारी शक्ति का प्रतीक बताया। वे तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार से बड़े अंतर से हार गईं। हार के बावजूद, विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच बीजेपी के संदेशखाली मुद्दे पर उनके राजनीतिक संदेशों में वे सुर्खियों में रही हैं।