पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच अब तक करीब 5,98,000 भारतीय नागरिक स्वदेश लौट चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (गल्फ) असीम आर महाजन ने बुधवार को दी। उन्होंने बताया कि दुबई में हाल ही में इंटरसेप्शन के मलबे के गिरने से हुई घटना में तीन भारतीय नागरिक मामूली रूप से घायल हुए हैं। उनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है और एक व्यक्ति को छुट्टी भी दे दी गई है। भारतीय वाणिज्य दूतावास लगातार घायलों और उनके परिवारों के संपर्क में है और हर संभव मदद कर रहा है।
महाजन ने बताया कि क्षेत्र से भारत आने वाली उड़ानों की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। “28 फरवरी से अब तक करीब 5.98 लाख यात्री भारत लौट चुके हैं। सुरक्षा और संचालन संबंधी कारणों से सीमित संख्या में अतिरिक्त उड़ानें चलाई जा रही हैं,” उन्होंने कहा। आज यूएई से भारत के लिए करीब 90 उड़ानों के संचालन की उम्मीद है। सऊदी अरब और ओमान के विभिन्न हवाई अड्डों से भी भारत के लिए उड़ानें चल रही हैं। कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुलने के बाद कतर एयरवेज की 8 से 10 उड़ानें आज भारत आ सकती हैं। वहीं कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र अभी बंद है, लेकिन वहां की एयरलाइंस सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट से विशेष उड़ानें संचालित कर रही हैं।
हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों पर पाबंदियों के कारण भारतीय नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है। ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते, इज़राइल से मिस्र और जॉर्डन के जरिए, इराक से जॉर्डन और सऊदी अरब के रास्ते, जबकि कुवैत और बहरीन से सऊदी अरब के जरिए भारत लाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए विशेष कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय है और क्षेत्र में स्थित सभी भारतीय मिशन स्थानीय सरकारों के संपर्क में हैं।
इसके अलावा, इराक के तट पर 11 मार्च को और कुवैत में 29 मार्च को जान गंवाने वाले दो भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर भी आज भारत लाए गए हैं। सरकार ने उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। गौरतलब है कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब दूसरे महीने में पहुंच गया है, जिसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।