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पुणे पोर्शे केस में आरोपियों की जमानत पर भड़के पीड़िता के पिता, बोले- कानून का डर खत्म हो गया

2024 के चर्चित पुणे पोर्शे हादसा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद मृतकों के परिजनों में नाराजगी बढ़ गई है। हादसे में जान गंवाने वाली अश्विनी के पिता सुरेश कोष्टा ने अदालत के फैसले और व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुरेश कोष्टा ने आरोप लगाया कि आरोपी परिवार कानून का मजाक उड़ा रहा है। उनका यह बयान उस वायरल वीडियो के बाद आया है, जिसमें कथित तौर पर आरोपी अग्रवाल परिवार के कुछ सदस्य जमानत मिलने के बाद जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “शायद उनके समाज में दो लोगों की हत्या कर जश्न मनाना आम बात है। वे आम नागरिकों का मजाक उड़ा रहे हैं।” कोष्टा ने कहा कि मौजूदा कानून अपराध रोकने में असफल साबित हो रहा है और नाबालिगों से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कानून आम आदमी का मजाक बना रहा है, क्योंकि यही कानून उन्हें सजा से बचने का रास्ता देता है। अगर कोई नाबालिग है तो वह कुछ भी कर सकता है।”

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से सख्त रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा फैसला आना चाहिए जिससे लोगों में कानून का डर पैदा हो। उन्होंने कहा, “अब कानून का कोई डर नहीं रह गया है। हाईकोर्ट सजा देता है और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल जाती है। इससे अपराध को बढ़ावा मिलता है।” सुरेश कोष्टा ने आरोपियों की जमानत रद्द करने और उनके माता-पिता के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

यह मामला मई 2024 में पुणे में हुए उस हादसे से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर एक नाबालिग द्वारा तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाई जा रही पोर्शे कार ने दो लोगों को कुचल दिया था। मामले में सबूतों से छेड़छाड़ और ब्लड सैंपल बदलने के आरोप भी लगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में इस मामले में तीन आरोपियों को जमानत दी थी। अदालत ने कहा था कि घटना गंभीर है और इसमें अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में आरोपियों को लगातार हिरासत में रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जाएगा।