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कभी सड़कों पर पोस्टर चिपकाते थे वेंकैया नायडू

केंद्र की सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी जब 2002 में अपने 22 साल पूरे होने का जश्न मनाने जा रही थी, तभी उसके हाथ से देश का सबसे बड़ा सूबा खिसक गया. इसी साल गुजरात के दंगे हुए थे और पार्टी के लिए इसे झटका माना जा रहा था. उत्तर प्रदेश की हार ने बीजेपी को इस कदर हिला दिया कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को सरकार और संगठन के भीतर बड़ी सर्जरी का फैसला लेना पड़ा. यह सर्जरी थी संगठन में नए चेहरे को लाने की और सरकार में पुराने चेहरे को भेजने की.

यह सर्जरी सबसे पहले बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष के जना कृष्णामूर्ति के कुर्सी पर की गई. 1 जुलाई 2002 को कृष्णामूर्ति की जगह 53 साल के एक युवा राजनेता को पार्टी की कमान सौंपी गई. इस युवा नेता का नाम था- मुप्पावरपु वेंकैया नायडू यानी एम वेंकैया नायडू.