Breaking News

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 2 ड्रग्स सप्लायर को अरेस्ट किया, करोड़ों का नशीला पदार्थ जब्त     |   ईरान युद्ध के बीच भारत रूसी तेल का आयात दोगुना करके 40 फीसदी तक कर सकता     |   UP: ‘एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी भाजपाई ही कर रहे’, बोले अखिलेश यादव     |   सोनिया गांधी की तबीयत में सुधार, एक या दो दिन में अस्पताल से मिलेगी छुट्टी     |   तमिलनाडु चुनाव: NDA की सहयोगी पार्टी तमिल मनीला कांग्रेस 5 सीटों पर चुनाव लड़ेगी     |  

केंद्रीय बजट 2026: ऑटो उद्योग की मांग- स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए ज्यादा आवंटन

केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले, ऑटोमोबाइल उद्योग सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा आवंटन और घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मजबूत नीतियां बनाने की मांग कर रहा है। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार और सरकारी सहयोग जरूरी है। खास कर शहरों के अंदर यात्रा के लिए गाड़ियों की रेंज बढ़नी चाहिए। ये देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के विकास को रफ्तार देने के लिए जरूरी हैं।

विनिर्माण क्षेत्र में, उद्योग और नीति के जानकारों ने बजट में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन के प्रावधान की मांग की है। इसका मकसद ज्यादा ऑटोमोबाइल निर्माताओं और उससे जुड़े सामान बनाने वालों को बढ़ावा देना है। ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण सामानों को स्थानीय स्तर पर बनाने के प्रावधान की भी अपील की है। उनका कहना है कि इससे लागत कम करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल सरकार पीएम ई-ड्राइव योजना के जरिए ईवी सेक्टर को सहयोग दे रही है। इसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों, यात्री गाड़ियों और बसों के लिए सब्सिडी के अलावा ऑटोमोबाइल और एसीसी बैटरी निर्माण के लिए पीएलआई प्रोत्साहन भी शामिल हैं। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि पीएलआई सुधार और बजट में निरंतर सहयोग से ईवी को अपनाने की रफ्तार तेज हो सकती है, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है और भारत के हरित गतिशीलता लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।