उत्तर प्रदेश में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण देने के लिए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को नए तरीके से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार केंद्र की प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITI (PM-सेतु) योजना के तहत ITI को उद्योग आधारित कौशल विकास केंद्रों के रूप में तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इसके पहले चरण में कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के राजकीय ITI क्लस्टरों को उद्योगों से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन संस्थानों में उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम, आधुनिक मशीनें और नई तकनीक उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
उद्योग बनेंगे ITI प्रशिक्षण के भागीदार
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि इन आठ शहरों के ITI क्लस्टरों के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स (AIP) की पहचान और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
सरकार का उद्देश्य शहरों के औद्योगिक स्वरूप और स्थानीय रोजगार की जरूरतों के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षण देना है। इससे ITI से प्रशिक्षण लेकर निकलने वाले युवाओं के कौशल और स्थानीय उद्योगों की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
पाठ्यक्रम से प्लेसमेंट तक उद्योगों की भूमिका
PM-सेतु मॉडल के तहत एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने में भूमिका निभाएंगे। इनमें उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करना, प्रशिक्षण मानकों को अपडेट करना और आधुनिक मशीनों व उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके अलावा ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स, एप्रेंटिसशिप, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, प्लेसमेंट लिंकेज और RPL क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों में भी उद्योगों की भागीदारी होगी। यानी ITI में प्रशिक्षण से लेकर रोजगार तक की प्रक्रिया को उद्योगों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
200 से ज्यादा कर्मचारियों वाले उद्योग बन सकेंगे पार्टनर
एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के लिए ऐसे उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU), उद्योग संगठन और अन्य संस्थाएं भाग ले सकती हैं, जिनमें 200 से अधिक कर्मचारी हों। पार्टनर के चयन में संबंधित क्लस्टर की औद्योगिक और कौशल जरूरतों के अनुरूप उद्योग की भूमिका को महत्व दिया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि प्रत्येक ITI क्लस्टर को स्थानीय उद्योगों और भविष्य में पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों के हिसाब से विकसित किया जाए।
PM-सेतु के तहत ₹60 हजार करोड़ के निवेश की योजना
PM-सेतु योजना के तहत अगले पांच वर्षों में देशभर के राजकीय ITI के बदलाव के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 30 हजार करोड़ रुपये, राज्य सरकारों की 20 हजार करोड़ रुपये और उद्योगों की 10 हजार करोड़ रुपये प्रस्तावित है। योजना के तहत देशभर में करीब 1,000 राजकीय ITI को हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इनमें लगभग 200 हब ITI और 800 स्पोक ITI शामिल होंगे।
हब एंड स्पोक मॉडल से जुड़ेंगे ITI
इस मॉडल में एक क्षेत्र या औद्योगिक क्लस्टर के ITI को आपस में जोड़ा जाएगा। हब ITI में आधुनिक उपकरण, बेहतर बुनियादी ढांचा, उद्योगों से संबंध और प्रशिक्षकों के विकास की सुविधाएं मजबूत की जाएंगी। वहीं स्पोक ITI को हब से जोड़कर प्रशिक्षण की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। इससे महंगे उपकरण, आधुनिक प्रयोगशालाएं, विशेषज्ञ प्रशिक्षक और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल एक से अधिक ITI के लिए किया जा सकेगा।
युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने पर जोर
योगी सरकार का लक्ष्य ITI प्रशिक्षण को सिर्फ कक्षा और प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार से जोड़ना है। उद्योगों की भागीदारी से छात्रों को एप्रेंटिसशिप और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। प्रदेश सरकार संबंधित जिलों में उद्योगों और MSME की पहचान कर उनसे संवाद भी बढ़ा रही है। जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय उद्योगों को PM-सेतु योजना से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार के अनुसार, इस पहल से एक तरफ युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों को उनकी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित मैनपावर उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी।