लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को याद किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए पोस्ट में राहुल गांधी ने बिरसा मुंडा को आदिवासी अस्मिता और अधिकारों के महानायक बताते हुए कहा कि उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में लिखा, "धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।" उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने अपना पूरा जीवन आदिवासी समाज के हितों की रक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके पारंपरिक अधिकारों को बचाने के लिए समर्पित कर दिया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन और विरासत आज भी न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष, साहस और विचारधारा समाज के कमजोर और वंचित तबकों को सशक्त बनाने तथा संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वालों का मार्गदर्शन करती है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी शासन के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मातृभूमि के लिए उनके त्याग और बलिदान की गाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करती रहेगी।
बिरसा मुंडा भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक माने जाते हैं। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जन्मे बिरसा मुंडा ने छोटानागपुर क्षेत्र में ब्रिटिश शासन और शोषण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने आदिवासी समुदायों को संगठित कर उनके भूमि और संसाधनों पर अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी। 9 जून 1900 को मात्र 25 वर्ष की आयु में बिरसा मुंडा का निधन हो गया था। आज भी उनके योगदान, संघर्ष और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को पूरे देश, विशेषकर आदिवासी समुदायों द्वारा सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।