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यौन शोषण मामला: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद होंगे गिरफ्तार या मिलेगी अग्रिम जमानत? कल इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई

यौन शोषण के आरोपों से घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार यानी 27 फ़रवरी को सुनवाई होगी. झूंसी थाने में दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले से गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है. जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई होगी. अग्रिम जमानत अर्जी में यूपी सरकार और पांच अन्य को पक्षकार बनाया गया है.

शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय, आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिग पीड़ित, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को पक्षकार बनाया गया है. अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के जरिए याचिका दाखिल की गई है. तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 173 (4) के तहत जिला कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. जिस पर एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था.

कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया है. झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और दो-तीन अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर बीएनएस की धारा 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5l, 6,3,4(2),16 और 17 के तहत दर्ज की गई है. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना भी शुरू कर दी है.

मामले में पुलिस ने अब तक दोनों पीड़ित नाबालिगों का बयान दर्ज कर मेडिकल भी करा लिया है. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि पीड़ितों के बयान में दो अन्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं. अरविंद मिश्रा और प्रकाश उपाध्याय के नाम यौन उत्पीड़न में सामने आए हैं. कोर्ट से अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी को अग्रिम जमानत नहीं मिलती है, तो झूंसी थाना पुलिस कभी भी उन्हें गिरफ्तार कर सकती है.