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राष्ट्रपति मुर्मू से मिले राघव चड्ढा, 12 बजे भगवंत मान भी करेंगे मुलाकात

आम आदमी पार्टी (AAP) के आंतरिक संकट और पंजाब के सांसदों के मुद्दे को लेकर पार्टी की लड़ाई अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है. आज पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यसभा सांसद राघव चड्डा दोनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे. मुख्यमंत्री भगवंत मान दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति से मिलेंगे. उनके साथ पंजाब के सभी आम आदमी पार्टी विधायक भी इस मुलाकात में शामिल होंगे.

दिल्ली रवाना होते वक्त सीएम मान ने इस बात पर जोर दिया कि आम आदमी पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और कहा, 'बैठक के लिए सिर्फ मुझे ही समय दिया गया है.' उन्होंने आगे कहा, 'राष्ट्रपति संविधान की संरक्षक हैं. वह देश की संवैधानिक प्रमुख हैं.' इससे पहले, मान ने पार्टी विधायकों से मिलने और BJP में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों को वापस बुलाने की मांग के लिए राष्ट्रपति से मिलने का वक्त मांगा था. हालांकि, बैठक के लिए केवल मान को ही समय दिया गया था. 

आम आदमी पार्टी पंजाब के विधायकों का आरोप है कि राघव चड्डा, संदीप पाठक और अन्य पांच सांसदों ने पंजाब के हितों के साथ धोखा किया है. विधायकों ने याद दिलाया कि इन्हें पंजाब के हितों की रक्षा के लिए राज्यसभा भेजा गया था, लेकिन ये सांसद पंजाब के साथ विश्वासघात कर रहे हैं.
विधायक राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान इन सांसदों को रिकॉल (वापस बुलाने) का प्रस्ताव रखेंगे. वह राष्ट्रपति के समक्ष पंजाब के हितों की रक्षा और सांसदों की जवाबदेही तय करने की मांग करेंगे. वहीं, यह मुलाकात AAP के अंदर चल रहे तनाव और पंजाब राजनीति में हो रहे घटनाक्रम को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है. दोनों तरफ से राष्ट्रपति भवन में होने वाली इन बैठकों पर पूरे राजनीतिक गलियारे की नजर टिकी हुई है. 

इसके अलावा राघव चड्ढा ने भी आज राष्ट्रपति से मुलाकात की. दरअसल, 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात- राघव चड्डा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने पार्टी के सिद्धांतों, मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटक जाने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में विलय कर लिया. AAP छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से थे.
वहीं, सोमवार को राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने आधिकारिक तौर पर सांसदों के बीजेपी में विलय को स्वीकार कर लिया, जिससे उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की पार्टी की संख्या घटकर अब तीन रह गई है.