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ब्रेन-डेड महिला के अंगदान से कई मरीजों को नई जिंदगी, परिवार के फैसले की सराहना

45 वर्षीय एक महिला, जिन्हें सेरेब्रल हेमरेज के कारण ब्रेन-डेड घोषित किया गया था, उनके परिवार ने एक महान और सराहनीय निर्णय लेते हुए उनके अंग दान कर दिए। इस निर्णय से कई गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नई जिंदगी मिली है। परिवार की सहमति से महिला के किडनी, लिवर और हृदय का दान किया गया। एक किडनी को नई दिल्ली स्थित एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम चरण के किडनी रोग से पीड़ित मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। लिवर को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली में एक गंभीर मरीज को दिया गया, जबकि हृदय का प्रत्यारोपण लखनऊ के एसजीपीजीआई में हृदय रोग से जूझ रहे मरीज को किया गया।

डॉक्टरों ने शुरुआती चरण में परिवार को ब्रेन डेथ की स्थिति के बारे में विस्तार से समझाया और आईसीयू में अंगों को सुरक्षित रखा गया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर द्वारा काउंसलिंग के बाद परिवार ने साहसिक निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दी। इसके बाद नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) ने अंगों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी की। सुबह करीब 3:30 बजे समन्वित तरीके से अंग निकाले गए, जिसमें हृदय को सीटीवीएस टीम, लिवर को लिवर ट्रांसप्लांट टीम और किडनी को यूरोलॉजी टीम ने सुरक्षित निकाला।

हृदय को एयर एंबुलेंस के जरिए लखनऊ भेजा गया, जबकि लिवर को दिल्ली पुलिस द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से आर्मी अस्पताल पहुंचाया गया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दानदाता के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक परिवार को सौंप दिया गया। इस पूरे अभियान की निगरानी ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और नोडल अधिकारी ने की, जो अस्पताल के निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्य कर रहे थे। प्रशासन ने इस कठिन समय में अंगदान का निर्णय लेने के लिए परिवार का आभार व्यक्त किया और इसे मानवता की मिसाल बताया। साथ ही, NOTTO, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी टीम और सुरक्षा कर्मियों के प्रयासों की भी सराहना की गई।