उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। अब खाद्य कारोबारियों को निरीक्षण के दौरान जरूरी प्रमाण-पत्र और अभिलेख उपलब्ध कराने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी देनी होगी।
विभाग के विशेष निरीक्षण अभियानों के दौरान कई प्रतिष्ठानों में जरूरी दस्तावेजों और उपभोक्ता सूचना से जुड़े प्रावधानों में कमियां सामने आई थीं। इसके बाद विभाग ने सभी संबंधित खाद्य कारोबारियों को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में चल रहे 'शुद्ध ही शुभ है' अभियान के तहत खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, खाद्य गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
निरीक्षण के समय रखने होंगे जरूरी दस्तावेज
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त रोशन जैकब के निर्देश के अनुसार खाद्य प्रतिष्ठानों में निरीक्षण के समय खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण उपलब्ध होना जरूरी होगा। इसके अलावा कर्मचारियों के स्वस्थता प्रमाण-पत्र भी रखने होंगे।
प्रतिष्ठान में इस्तेमाल होने वाले पानी की आईएस 10500 मानक के अनुसार हर छह महीने की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध होनी चाहिए। इसके साथ ही पेस्ट कंट्रोल प्रमाण-पत्र, कच्चे माल की खरीद के बिल, स्टॉक रजिस्टर और साफ-सफाई से जुड़े शेड्यूल व रिकॉर्ड भी निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत करने होंगे।
एमएसजी और आर्टिफिशियल कलर की देनी होगी जानकारी
खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले एडिटिव को लेकर भी उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देनी होगी। यदि किसी खाद्य पदार्थ में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी/अजीनोमोटो) का इस्तेमाल किया गया है तो पैकेज या मेन्यू कार्ड पर यह जानकारी देनी होगी कि 12 महीने से कम उम्र के शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए एमएसजी का सेवन अनुशंसित नहीं है। इसके अलावा इस्तेमाल किए गए आर्टिफिशियल स्वीटनर का प्रकार और आर्टिफिशियल कलर का नाम भी पैकेज या मेन्यू कार्ड पर बताना होगा।
मेन्यू कार्ड पर एलर्जन की जानकारी जरूरी
खाद्य प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू कार्ड पर खाद्य पदार्थों में मौजूद संभावित एलर्जन की जानकारी भी देनी होगी। इससे उपभोक्ता खाना ऑर्डर करने या खाने से पहले यह जान सकेंगे कि उसमें ऐसा कोई पदार्थ तो नहीं है जिससे उन्हें एलर्जी हो सकती है।
बड़े प्रतिष्ठानों को बतानी होगी कैलोरी
जिन खाद्य प्रतिष्ठानों के पास केंद्रीय लाइसेंस है या जिनके 10 या उससे अधिक आउटलेट हैं, उन्हें मेन्यू कार्ड, बोर्ड या बुकलेट में खाद्य पदार्थ की प्रति सर्विंग कैलोरी की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक खाद्य पदार्थ का सर्विंग साइज भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
फूड पैकेजिंग में फूड ग्रेड एल्युमिनियम फॉयल जरूरी
तैयार खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली एल्युमिनियम फॉयल भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। विभाग के निर्देश के अनुसार प्रिपेयर्ड फूड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली फॉयल पैकेजिंग विनियम, 2018 के मानकों के अनुरूप और फूड ग्रेड होनी चाहिए।
कुकिंग मीडियम की जानकारी भी देनी होगी
खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कुकिंग मीडियम की जानकारी भी उपभोक्ताओं को देनी होगी। यह जानकारी मेन्यू कार्ड या प्रतिष्ठान में ऐसे स्थान पर प्रदर्शित करनी होगी, जहां उपभोक्ता उसे आसानी से देख सकें।
रेडी-टू-कुक सामग्री पर भी जरूरी जानकारी
प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली सेमी-कुक्ड या रेडी-टू-कुक पैक्ड सामग्री के पैकेज पर उसके इंग्रीडिएंट्स और स्टोरेज कंडीशंस की जानकारी देना अनिवार्य होगा। वहीं, विनिर्माण इकाई से गोदाम तक ऐसी सामग्री के परिवहन के दौरान भी निर्धारित भंडारण शर्तों का पालन करना होगा। यानी पूरी सप्लाई चेन के दौरान खाद्य सामग्री की तय स्टोरेज कंडीशन बनाए रखना जरूरी होगा।
1 नवंबर से होगी अनुपालन की जांच
विभाग ने इन निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। 1 नवंबर 2026 से विभागीय प्रवर्तन और निरीक्षण कार्रवाई के दौरान इन सभी बिंदुओं के अनुपालन की जांच की जाएगी। विभाग का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को मजबूत करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है। लाइसेंस, जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के साथ एलर्जन, एडिटिव, कैलोरी, कुकिंग मीडियम और पैकेजिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होने से खाद्य कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।