मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र में तीन दिन पहले गैरेज संचालक पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में गेरैज संचालक को ही गिरफ्तार करते हुए हमले में इस्तेमाल पिस्टल बरामद की है। जांच में सामने आया कि गैरेज संचालक ने 10 लाख के लेनदेन के विवाद में दूसरे पक्ष को फंसाने के लिए खुद ही अपनी गाड़ी पर फायरिंग की थी। इसके बाद पुलिस ने हमले के आरोपी तीनों युवकों को क्लीन चिट दे दी है। शताब्दी नगर सेक्टर एक निवासी शशांक कारों की धुलाई का काम करता है। चार जनवरी को शशांक ने परतापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि मनोज, संचित और मनीष ने शशांक पर जानलेवा हमला करते हुए उसकी वैगनआर कार पर पांच राउंड फायरिंग की है।
वहीं इस पूरे मामले में एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो शशांक के आरोप गलत निकले। जांच में सामने आया की संचित के कहने पर शशांक ने मनोज से 10 लाख रुपए देकर एक फॉर्च्यूनर कार खरीदी थी। मगर इस कार का पूरा पेमेंट नहीं दिया। इसके बाद मनोज डुप्लीकेट चाबी से कार को उठाकर ले गया। मनोज ना तो शशांक के पैसे वापस कर रहा था और ना ही कार वापस दे रहा था। जिसके चलते शशांक ने मनोज और उसके साथियों के खिलाफ जानलेवा हमले का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में शशांक को गिरफ्तार करते हुए उसके पास से हमले में प्रयुक्त 32 बोर की देसी पिस्टल बरामद की गई है। वहीं, इस मामले में आरोपी बनाए गए तीनों युवकों को क्लीन चिट दे दी गई है।