लोकसभा ने शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर संयुक्त समिति (JPC) की रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा बढ़ाकर मानसून सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक कर दी है। इन विधेयकों में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं। बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने सदन में समय बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत यह प्रावधान किया गया है कि जो व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल में है, वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र व राज्य सरकार में मंत्री पद पर नहीं रह सकेगा। साथ ही, किसी आरोपी नेता को गिरफ्तारी के 30 दिनों के भीतर जमानत हासिल करनी होगी, अन्यथा 31वें दिन उसे पद से हटाना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो वह स्वतः ही अपने पद के लिए अयोग्य हो जाएगा।
इससे पहले नवंबर में संसद ने इन तीनों विधेयकों की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपराजिता सारंगी को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह समिति लोकसभा और राज्यसभा के कुल 31 सदस्यों से मिलकर बनी है। लोकसभा के सदस्यों में रविशंकर प्रसाद, भर्तृहरि महताब, प्रदन बरुआ, बृजमोहन अग्रवाल, विष्णु दयाल राम, सुप्रिया सुले और असदुद्दीन ओवैसी सहित अन्य शामिल हैं। वहीं राज्यसभा से बृज लाल, उज्ज्वल निकम, नाबम रेबिया, डॉ. के. लक्ष्मण, सुधा मूर्ति, बीरेन्द्र प्रसाद बैश्य और एस. निरंजन रेड्डी को नामित किया गया है। गौरतलब है कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), समाजवादी पार्टी (एसपी) और डीएमके के सदस्यों ने इस समिति में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है। संयुक्त समिति इन विधेयकों की विस्तृत समीक्षा कर विचार-विमर्श के बाद अपनी सिफारिशें संसद को सौंपेगी।