Breaking News

आईएएस अशोक कुमार दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बने, आर एलिश वाज की जगह लेंगे     |   BJP का अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन पहली बार पटना स्थित प्रदेश कार्यालय पहुंचे     |   बांग्लादेश EC ने चुनाव के दिन मतदान केंद्रों के 400 गज दायरे में मोबाइल बैन किया     |   दिल्ली: शास्त्री पार्क इलाके में बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर ₹80 लाख की लूट की     |   केरल हाई कोर्ट ने मंदिरों में गैर-हिंदुओं के बैन नियम पर सरकार से रिव्यू करने को कहा     |  

Justice Surya Kant: देश के 53वें CJI बने जस्टिस सूर्यकांत, जानें कानूनी सफर

Justice Surya Kant: जस्टिस सूर्यकांत ने आज भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली, भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई। यह समारोह आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुई, CJI पद पर जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक होगा। जस्टिस सूर्यकांत के पास जज के रूप में काम करने का दो दशक से अधिक लंबा अनुभव है, वो हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में आए। उन्होंने जिन फैसलों को लिखा, उनमें अनुच्छेद-370, अभिव्यक्ति की आजादी, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता से जुड़े ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, उनके शपथ ग्रहण की खास बात ये रही कि उन्होंने ये हिंदी में ली। इस  दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा मौजूद रहे।

महत्वपूर्ण मामले
1.   चुनाव आयोग को बिहार में मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए 65 लाख मतदाताओं का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था।
2.   उस संविधान पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा था।
3.   ओआरओपी (वन रैंक वन पेंशन) को संाविधानिक रूप से वैध माना और भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए समान अवसरों का समर्थन किया।
4.   जस्टिस कांत उस पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने असम से संबंधित नागरिकता के मुद्दों पर धारा 6ए की वैधता को बरकरार रखा था।
5.   जस्टिस कांत दिल्ली आबकारी शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य थे। हालांकि, उन्होंने केजरीवाल की गिरफ्तारी को जायज ठहराया था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के छोटे-से गांव पेटवाड़ (नारनौंद) में मदनगोपाल शास्त्री और शशि देवी के घर हुआ। पिता संस्कृत के शिक्षक थे, जबकि माता एक साधारण गृहिणी। वे पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके तीन भाई ऋषिकांत (सेवानिवृत्त शिक्षक), शिवकांत (डॉक्टर) और देवकांत (सेवानिवृत्त आईटीआई प्रशिक्षक) और एक बहन कमला देवी हैं। पिता चाहते थे कि बेटा उच्च कानूनी शिक्षा (एलएलएम) प्राप्त करे, मगर जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें मनाया कि वह एलएलबी के बाद सीधे वकालत शुरू करेंगे।
जस्टिस सूर्यकांत की शादी वर्ष 1980 में सविता शर्मा से हुई थी, उनके परिवार में दो बेटियां हैं, जो कानून में स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई कर रही हैं।

कानूनी सफर
जस्टिस सूर्यकांत ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से 1984 में कानून की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने हिसार जिला न्यायालय में अपने कानूनी सफर की शुरुआत भी की। एक साल यहां वकालत करने के बाद 1985 में, न्यायमूर्ति कांत पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपनी वकालत शुरू करने के लिए चंडीगढ़ चले गए। इसी हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से कानून में स्नातकोत्तर की डिग्री भी हासिल की।

विवादों में रहे
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में रहने के दौरान जस्टिस सूर्यकांत पर गंभीर कदाचार के आरोप लगे थे। 2012 में, एक रियल एस्टेट एजेंट ने उन पर करोड़ों रुपये के लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाया था। 2017 में, पंजाब के एक कैदी ने शिकायत दर्ज कराई और कहा कि जस्टिस कांत ने जमानत देने के लिए रिश्वत ली थी। हालांकि, ये आरोप साबित नहीं हो सके।

सबसे युवा महाधिवक्ता
जस्टिस कांत महज 38 वर्ष की आयु में सात जुलाई, 2000 को हरियाणा के सबसे कम उम्र के महाधिवक्ता बने। इसके बाद वह वरिष्ठ अधिवक्ता भी नियुक्त हुए और 2004 में उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। 14 वर्षों से अधिक समय तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवा देने के बाद, वह अक्तूबर, 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और फिर 24 मई, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने।