1990 में जब भारतीय जनता पार्टी शिखर पर जा रही थी और पार्टी के भीतर अटल-आडवाणी का दबदबा कायम हो गया था, तब बीजेपी के शीर्ष पद पर एक ऐसे नेता का उदय होता है, जिसे आडवाणी और अटल के मुकाबले संगठन का तजुर्बा नहीं था. इस नेता का नाम था- मुरली मनोहर जोशी.
साइंस के प्रोफेसर रहे मुरली मनोहर जोशी 1991 में बीजेपी के अध्यक्ष बने थे. वे 1993 तक इस पद पर रहे. सियासी गलियारों में जोशी को अटल-आडवाणी के साथ त्रिदेव की उपाधि दी गई थी.