जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही है और साथ ही सियासत भी चरम पर है. सभी पार्टियां अपने अपने दावों और वादों के साथ जनता के बीच पहुंच रही हैं और जनता को लुभाने का प्रयास कर रही हैं. लेकिन इन चुनावी वादों और दावों के शोर के बीच जमीनी हकिकत कुछ और है जिसे लेकर लोगों में गुस्सा है. रामबन जिले की बनिहाल सीट पर 18 सितंबर को वोटिंग हानी है जिससे पहले बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने पर गुज्जर समुदाय ने दी बहिष्कार की धमकी दे डाली है.
विकास के मुद्दे ने पकड़ा जोर
चुनावों से पहले बनिहाल में विकास का मुद्दा जोर पकड़ रहा है. शहर के पास बसे एक गांव के गुज्जर समुदाय ने बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने पर चुनाव के बहिष्कार की धमकी दी है. लोगों का कहना है कि उनका गांव बनिहाल नेशनल हाइवे के बहुत पास है, बावजूद इसके वे पानी, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों से महरूम हैं. सड़कों के अभाव के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. हालात ये है कि बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भी खंभे नहीं हैं. लाइन पेड़ों पर लटक रही है जिससे लोगों की जान को खतरा है. यहां तक की पानी की सुविधा से भी लोग वंछित हैं. इलाके की सड़कों की लंबे समय से मरम्मत नहीं होने से भी लोग परेशान हैं.
बार बार प्रशासन को इन हालातों के बारे में बताया गया लेकिन अब तक कुछ भी नहीं बदला है. लोग ये सवाल कर रहे हैं कि आखिर राजनेताओं ने उनके लिए क्या किया है और साथ ही ये चेतावनी भी दे डाली है कि अगर मांगे पूरी नहीं हुई तो लोग वोट नहीं डालेंगे.
मतदान का बहिष्कार
मिली जुली राय के बावजूद गुज्जर समुदाय में इस बात पर एकता है कि बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने पर कोई वोट नहीं डालेगा. जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस से हाथ मिलाया है लेकिन इस सीट पर दोनों ही पार्टियों ने उम्मीदवार उतारे हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सज्जाद शाहीन को और कांग्रेस ने विकार रसूल वानी को टिकट दिया है. बीजेपी ने सलीम भट्ट को दिया है तो पीडीपी ने इम्तियाज अहमद शान पर भरोसा जताया है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 18 सितंबर से एक अक्टूबर के बीच तीन चरणों में चुनाव होने हैं जिनके नतीजे आठ अक्टूबर को आएंगे.