Breaking News

अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो इंडिया ब्लॉक को 185 सीटें संभव: MOTN सर्वे     |   WB: TMC का पुलिस पर अभिषेक बनर्जी-डेरेक ओ'ब्रायन के साथ मारपीट का आरोप     |   47% लोगों ने कहा कि परिसीमन से जोड़े बिना महिला आरक्षण लागू हो: MOTN सर्वे     |   47% ने कहा राम मंदिर चढ़ावा चोरी का केंद्र-राज्य सरकारों पर नकारात्मक असर: MOTN     |   MOTN सर्वे में 70 फीसदी लोगों ने 'एक देश, एक चुनाव' का समर्थन किया     |  

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव, EC ने जारी किया शेड्यूल

चुनाव आयोग ने 10 राज्यों में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग ने बताया है कि चुनाव 16 मार्च को होंगे। आयोग ने बताया है कि महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार की सीटों पर चुनाव कराए जाएंगे। ये सीटें अप्रैल महीने में अलग-अलग तारीखों को खत्म हो रही है। गौरतलब है कि राज्यसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है। लेकिन हर एक तिहाई सीटों के लिए हर दो साल पर चुनाव कराए जाते हैं। इस वजह से ही राज्यसभा को स्थाई सदन कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है कि क्योंकि लोकसभा की तरह राज्यसभा कभी भंग नहीं होती है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद नामांकन के लिए आखिरी तारीख 5 मार्च है। वहीं नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 मार्च है। 16 को चुनाव होंगे। उसी दिन शाम के पांच बजे से वोटों की गिनती शुरु हो जाएगी। राज्यसभा के चुनाव लोकसभा से बहुत अलग होते हैं। यहां जनता सीधे वोट नहीं डालती। राज्यसभा के सदस्यों को राज्यों की विधानसभाओं के विधायक (MLAs) चुनते हैं। यह अप्रत्यक्ष चुनाव होता है। राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं, जिनमें से 233 सदस्य राज्यों और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों से चुने जाते हैं और 12 को राष्ट्रपति नामित करते हैं। हर सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है और हर 2 साल में करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, इसलिए चुनाव नियमित रूप से होते रहते हैं।

चुनाव की प्रक्रिया खास है। विधायक बैलेट पेपर पर वोट डालते हैं। यह खुला मतदान होता है, यानी पार्टी को अपना वोट दिखाना पड़ता है। हर विधायक अपनी पसंद के उम्मीदवारों को नंबर देता है जैसे 1, 2, 3... (वरीयता के आधार पर)। अगर कोई उम्मीदवार पहले ही जरूरी वोट (कोटा) पा ले, तो उसके अतिरिक्त वोट दूसरी पसंद पर चले जाते हैं।

इससे छोटे-बड़े दलों को भी सीट मिल सकती है, लेकिन ज्यादातर बड़ी पार्टियां जीतती हैं। अगर उम्मीदवार रिक्त सीटों से कम या बराबर हों, तो बिना वोटिंग के ही निर्वाचित हो जाते हैं। यह तरीका इसलिए बनाया गया है ताकि राज्यसभा में सभी राज्यों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो और राजनीतिक दल अपनी ताकत के हिसाब से सदस्य भेज सकें। बड़े राज्यों में ज्यादा सीटें होती हैं।