जम्मू-कश्मीर में चुनावों को लेकर सरगर्मिया बढ़ती जा रही हैं. जहां इस सियासी रण में पहली टक्कर घोषणा पत्र पर हो रही है। एक तरफ है बीजेपी का घोषणा पत्र और दूसरी तरफ है इंडिया गठबंधन की ओर से अब तक जारी किया गया नेशनल कान्फ्रेंस का घोषणा पत्र। विपक्ष की ओर जारी घोषणा पत्र को लेकर बीजेपी अनुच्छेद 370 की वापसी और पाकिस्तान से बातचीत वाले चुनावी वादे पर सवाल खड़े कर रही है तो वहीं इंडिया गठबंधन मजहब का कार्ड निकाल चुका है।
घोषणा पत्र को लेकर ये घमासान तब ही शुरू हो गया था जब नेशनल कानफ्रेंस की ओर से घोषणा पत्र जारी किया गया था। कांग्रेस और पैंथर्स पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे नेशनल कान्फ्रेंस के लिए 370 की वापसी सबसे बड़ी चुनावी मुद्दा और वादा था। अब तक कांग्रेस पार्टी की ओर से जम्मू-कश्मीर के लिए कोई अलग घोषणा पत्र जारी नहीं किया गया है लेकिन जब राहुल गांधी अनंतनाग चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचे तो वो भी एनसी के घोषणा पत्र के एक वादे को दोहरा आए और उन्होंने भी ये कह दिया कि वो जल्द अनुच्छेद 370 को दोबारा बहाल करेंगे।
नेशनल कान्फ्रेंस का घोषणा पत्र
एनसी की ओर से अपने घोषणा पत्र में 12 चुनावी वादे किए गए हैं जिनमें से 5 वादे अनुच्छेद 370 की वापसी से जुड़े हैं।
1. अनुच्छेद 370 35A की बहाली
2. जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने का वादा
3. 24 साल पहले लागू स्वायत्तता प्रस्ताव लागू करना
4. पाकिस्तान से बातचीत शुरू कराने का वादा
5.राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का वादा
हालांकि नेशनल कानफ्रेंस हो या पीडीपी इससे पहले जम्मू-कश्मीर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों तक इन दलों ने अनुच्छेद 370 को ही मुद्दा बनाया था और तब नतीजे एसे आए थे कि बीजेपी को लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 2 सीटें और 24.26 फिसगी वोट ही मिला था। इसी के साथ कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली थी और 29.38 फीसदी वोट मिले थे। एनसी को 2 सीटें और 22.30 फीसदी वोट मिले। जबकि पीडीपी को 0 सीटें और 8.48 फीसदी वोट मिले थे. अन्य के खाते में 1 सीट और 14.8 फीसदी वोट आए थे।