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जीएसटी ने पूरे किए 8 साल, कर प्रणाली में पारदर्शिता की मिसाल

New Delhi: आठ साल हो गए, जब भारत में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स या जीएसटी की शुरुआत हुई थी। वो तारीख थी, एक जुलाई 2017. माना जाता है कि देश में कर सुधार की दिशा में ये सबसे बड़ा कदम था। हाल में एक सर्वे के मुताबिक 85 फीसदी कारोबारियों ने अपने कामकाज में जीएसटी के सकारात्मक असर को स्वीकार किया है। 2017 में पंजीकृत करदाताओं की संख्या 65 लाख थी। जीएसटी शुरू होने के बाद से ये संख्या बढ़कर एक करोड़ 51 लाख से ज्यादा हो गई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सकल जीएसटी संग्रह पांच साल में दोगुना हो गया है। वित्तीय साल 2021 में 11.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपया पहुंच गया है। ये अब तक का सबसे ज्यादा संग्रह है। वित्तीय साल 2025 के संग्रह में भी पिछले साल के मुकाबले 9.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वित्तीय साल 2025 में औसत मासिक जीएसटी संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्तीय साल 2024 में 1.68 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। जानकारों का कहना है कि जीएसटी से छोटे व्यवसायों को मदद मिली है। अब वे पेट्रोलियम जैसे छूट वाले उत्पादों को भी कर के दायरे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

जीएसटी ने एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने में मदद की है। व्यापार करने की लागत कम की है। करीब 17 स्थानीय करों और 13 उपकरों को पांच-स्तरीय ढांचे में लाने से कर प्रणाली में पारदर्शिता आई है। पिछले आठ साल में कर संग्रह में हुई लगातार बढ़ोतरी देश के अप्रत्यक्ष कर प्रशासन को सुव्यवस्थित करने का सबूत है।