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फरीदाबाद में डॉक्टरों का कमाल, दो साल के बच्चे की एयरवे से निकाली खतरनाक वस्तु

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में दो वर्षीय बच्चे की जान समय रहते डॉक्टरों की सतर्कता और विशेषज्ञों की टीमवर्क से बचा ली गई। शुरुआत में सामान्य खांसी लग रही समस्या बाद में गंभीर एयरवे इमरजेंसी में बदल गई, जिसके बाद बच्चे का तत्काल इलाज किया गया। बच्चे को 11 मई को अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। उसे लगातार खांसी, सांस लेते समय आवाज आना, सांस लेने में दिक्कत और बीच-बीच में बुखार की शिकायत थी। डॉक्टरों के अनुसार ये लक्षण करीब एक सप्ताह से बने हुए थे।

परिजनों ने पहले स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क किया था, लेकिन इलाज के बावजूद खांसी में सुधार नहीं हुआ। जांच के दौरान माता-पिता ने बताया कि कुछ दिन पहले बच्चा टीवी रिमोट के एक छोटे बल्बनुमा हिस्से के संपर्क में आया था और संभव है कि वह गलती से उसके गले में चला गया हो। डॉक्टरों को शक हुआ कि वह वस्तु भोजन नली की बजाय बच्चे की सांस की नली में फंस गई है। इसके बाद बच्चे को तुरंत अमृता अस्पताल रेफर किया गया।

जांच में पता चला कि वह वस्तु फेफड़े के भीतर दाहिने हिस्से की निचली ब्रोंकस तक पहुंच चुकी थी। डॉक्टरों ने बताया कि स्थिति काफी जटिल थी क्योंकि उस वस्तु में धातु के तार और कांच का नाजुक हिस्सा मौजूद था। लंबे समय तक वस्तु फंसे रहने के कारण एयरवे में ग्रेनुलेशन टिश्यू भी बन गया था, जिससे उसे निकालना और ज्यादा जोखिम भरा हो गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी, एडल्ट पल्मोनोलॉजी, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया और ENT विभाग की विशेषज्ञ टीमों ने मिलकर इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की तैयारी की। डॉ. मनींदर ढालीवाल, डॉ. सौरभ पाहुजा और डॉ. रिधिमा भाटिया समेत विशेषज्ञों की टीम ने उन्नत ब्रोंकोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बेहद सावधानी से बच्चे की सांस की नली से वस्तु को बाहर निकाला।

सफल प्रक्रिया के बाद बच्चे को तुरंत राहत मिली और उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। इलाज के बाद अगले ही दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। यदि किसी बच्चे को किसी वस्तु के गले में फंसने के बाद लगातार खांसी, सांस लेने में आवाज या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।