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CJI गवई पर जूता फेंकने वाले शख्स को दिल्ली पुलिस ने किया रिहा

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बीआर गवई पर हमले की कोशिश करने वाले आरोपी वकील को दिल्ली पुलिस ने हिरासत से रिहा कर दिया है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है. पुलिस अधिकारियों ने आरोपी से तीन घंटे तक पूछताछ की, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया गया. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक वकील ने चीफ जस्टिस बीआर गवई पर जूता उछालने की कोशिश की थी. हालांकि, उस समय कोर्ट में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया था. घटना को अंजाम देते हुए आरोपी ‘सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेंगे’ चिल्ला रहा था. घटना को नजरअंदाज करते हुए चीफ जस्टिस ने कोर्ट में शांति बनाए रखने की अपील की.

गवई ने हमला करने वाले आरोपी के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने से मना कर दिया था, जिसके बाद से ही माना जा रहा था कि पुलिस उसे हिरासत से रिहा कर देगी. गवई ने इस घटना को लेकर कहा था कि उन्हें ऐसी किसी भी घटना से कोई फर्क नहीं पड़ता है. आरोपी की पहचान वकील राकेश किशोर के रूप में हुई है. वकील राकेश किशोर का जूता भी वापस किया गया.

आधार कार्ड और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का कार्ड व मोबाइल भी वापस दिया गया. सीजेआई बीआर गवई के कोई कार्रवाई ना करने के फैसले के बाद ये कदम उठाया गया. CJI ने रजिस्ट्री अफसरों से कहा था कि JUST IGNORE. हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकील पर कार्रवाई की है और उनका लाइसेंस सस्पेंड किया गया है.

पीएम मोदी ने इस घटना को लेकर चीफ जस्टिस से फोन पर बात की. इस बात की जानकारी पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी. उन्होंने चीफ जस्टिस के धैर्य की सराहना करते हुए लिखा कि कोर्ट में उनके ऊपर हुए हमले से पूरा देश चिंतित है. हमारे समाज में इस तरह की घटना के लिए कोई जगह नहीं है और यह बहुत ही निंदनीय है. इसके आगे उन्होंने लिखा कि हालांकि ऐसी स्थिति में चीफ जस्टिस गवई के धैर्य की मैं सराहना करता हूं.

चीफ जस्टिस पर कोर्ट में हुए हमले की देश भर में कड़ी निंदा की जा रही है. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हमला चीफ जस्टिस पर नहीं, बल्कि भारत के संविधान पर हुआ है. वहीं सोनिया गांधी ने भी इस हमले की निंदा की और इसे संविधान का अपमान बताया.