Odisha: छेनियों की तीखी आवाज़ और हथौड़ों की लय रथ खला में गूंज रही है। रथ बनाने वाले कारीगर और मूर्तिकार ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की आगामी रथ यात्रा के लिए बड़े रथों को बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। हर प्रहार और नक्काशी के साथ, सदियों पुरानी परंपरा जीवंत हो उठती है। कारीगर इस काम को अपने लिए पवित्र और बेहद खास मानते हैं। इसलिए वे इसे समय पर पूरा करने के लिए दिन-रात जुटे दिखते हैं।
रथों के पहिये लगभग बनकर तैयार हैं। बारीक डिजाइन, चित्रकारी और फिटिंग का काम जोरों पर है। श्रमिकों के मुताबिक रथ बनाने के काम का दूसरा चरण शुरू हो गया है। इसमें रथ के पहले से तैयार 42 पहियों में जरूरी लकड़ी के पुर्जे लगाने का काम किया जाना है।
पुरी में होने वाली भगवान जगन्नाथ की सालाना रथ यात्रा के लिए रथ बनाने का काम पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ शुरू होता है। इस साल ये प्रक्रिया 75 कुशल कारीगरों द्वारा पूरी की जा रही है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि वे सालाना रथ यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देखने और इसमें शामिल होने के लिए हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं।
पुरी रथ उत्सव हर साल मनाया जाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियों को एक भव्य जुलूस के साथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है और फिर वापस लाया जाता है। पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 27 जून को होगी जबकि पांच जुलाई को उन्हें जगन्नाथ मंदिर में वापस लाया जाएगा।