लोनी के यमुना खादर में अवैध कॉलोनियों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बुलडोजर कार्रवाई में एक ऐसा परिवार भी चपेट में आ गया, जिसने आरोप लगाया है कि प्रशासन की गलती और प्रॉपर्टी डीलर की धोखाधड़ी की वजह से उनका घर उजड़ गया।पीड़ित महिला का कहना है कि जब उन्होंने संबंधित प्लॉट खरीदा था, उस समय प्रशासन की ओर से किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने उन्हें यह नहीं बताया कि यह जमीन डूब क्षेत्र में आती है और यहां निर्माण प्रतिबंधित है। महिला के अनुसार यदि उन्हें पहले ही स्पष्ट रूप से मना किया जाता या लिखित रूप में जानकारी दी जाती, तो वे कभी भी यह प्लॉट नहीं खरीदतीं।
महिला ने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी डीलर ने उन्हें यह कहकर भरोसे में लिया कि जमीन पूरी तरह सुरक्षित है और यहां मकान बनवाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। डीलर ने प्रशासन की कार्रवाई का कोई खतरा नहीं बताया और झूठे आश्वासन देकर प्लॉट बेच दिया। महिला का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय रहते न तो रोक लगाई गई और न ही आम लोगों को जागरूक किया गया, जिससे कई परिवार इस जाल में फंस गए।
पीड़िता का यह भी आरोप है कि मकान निर्माण के दौरान न तो किसी विभाग ने काम रुकवाया और न ही कोई नोटिस दिया गया। निर्माण चलता रहा और प्रशासन ने कोई आपत्ति नहीं जताई। लेकिन अचानक बिना पूर्व सूचना के बुलडोजर चलाकर उनका मकान ध्वस्त कर दिया गया। महिला का कहना है कि एक झटके में उनका आशियाना उजाड़ दिया गया और परिवार अब खुले आसमान के नीचे आ गया है।
पीड़ित परिवार का सवाल है कि यदि जमीन अवैध थी और डूब क्षेत्र में आती थी, तो प्रशासन ने शुरुआत में ही कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों को प्लॉट बेचने से पहले कॉलोनाइजरों और प्रॉपर्टी डीलरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। महिला का कहना है कि इस पूरे मामले में प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही के साथ-साथ प्रॉपर्टी डीलर की धोखाधड़ी ने आम लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि यमुना खादर क्षेत्र में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई नियमों के तहत की गई है। हालांकि पीड़ित महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या प्रशासन की समय पर चेतावनी और निगरानी से लोगों का घर उजड़ने से बचाया जा सकता था। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से न्याय, मुआवजे और प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।