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EPFO से 19.33 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी, CBI ने Nokia के दो कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज किया केस

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से करीब 19.33 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ीपूर्ण निकासी के मामले में Nokia Solutions & Networks India Pvt Ltd के दो कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों की पहचान वैभव वर्मा और कामराजू मुत्याला के रूप में हुई है। इनके अलावा अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

मामला वर्ष 2023 से 2024 के बीच का है। उस दौरान Nokia, EPF अधिनियम 1952 के तहत अपने ‘Exempted Establishment’ का दर्जा खत्म करने की प्रक्रिया में थी। FIR के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर भविष्य निधि की रकम को 94 फर्जी या गैर-वास्तविक कर्मचारियों के खातों में ट्रांसफर किया।

यह मामला तब सामने आया जब EPFO की Zonal Fraud Risk Management Committee ने CPGRAMS पोर्टल पर मिली शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच में शुरुआत में संदिग्ध 70 खातों की पहचान हुई, जिनमें से 66 का Nokia के साथ कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं पाया गया। आगे की जांच में 28 और गैर-वास्तविक सदस्यों का पता चला, जिसके बाद ऐसे खातों की कुल संख्या 94 हो गई।

इसके बाद Nokia Solutions & Networks India Pvt Ltd ने मामले की आंतरिक फोरेंसिक जांच कराई। जांच में वैभव वर्मा और कामराजू मुत्याला को कथित फर्जी ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड तैयार करने और प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार प्रमुख अधिकारियों के रूप में चिन्हित किया गया। कंपनी की जांच में यह भी सामने आया कि EPFO को दस्तावेज जमा करने के कुछ समय बाद आरोपियों के लैपटॉप से संबंधित फाइलें कथित तौर पर डिलीट कर दी गई थीं।

FIR में कहा गया है कि फोरेंसिक जांच के दौरान ऐसे इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन मिले, जिनमें Nokia के कर्मचारी नहीं होने वाले लोगों की जानकारी, उनके रोजगार से संबंधित कथित फर्जी पुष्टि और आधिकारिक क्रेडेंशियल का इस्तेमाल कर फर्जी खातों के KYC विवरण को मंजूरी देने से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे।

आंतरिक जांच के बाद Nokia ने दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की। EPFO को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने कथित तौर पर ब्याज समेत करीब 20 करोड़ रुपये संगठन में जमा कराए। वहीं, EPFO की आंतरिक जांच में Past Accumulation Statements को प्रोसेस करने के दौरान प्रक्रियात्मक और निगरानी संबंधी खामियां भी सामने आईं। अब CBI की मुंबई स्थित आर्थिक अपराध शाखा (EOW) मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य इस कथित धोखाधड़ी में शामिल सभी लोगों की पहचान करना और गबन की गई रकम के प्रवाह का पता लगाना है।