तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सितंबर में शहर में डेंगू के 1,290 मामले सामने आए, जो अगस्त में दर्ज 605 मामलों से दोगुने से भी ज्यादा हैं। तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 30 सितंबर को ही चेन्नई में डेंगू के 72 नए मामले सामने आए। राज्य के अन्य हिस्सों में भी डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों ने मरीजों के इलाज और निगरानी के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।
अस्पतालों में डेंगू के लिए अलग वार्ड
थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग वयस्क और बाल चिकित्सा वार्ड तैयार किए गए हैं। अस्पताल में वयस्क मरीजों के लिए करीब 60 और बच्चों के लिए 40 बेड निर्धारित किए गए हैं।
इन सभी बेड को अलग रखा गया है और मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी लगाई गई है। अस्पताल में डेंगू की जांच और इलाज की भी व्यवस्था की गई है। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आर. पद्मनाभन के मुताबिक, अस्पताल में IV फ्लूइड, दवाएं, प्लाज्मा और ब्लड कंपोनेंट्स पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
डेंगू के तीन चरण
डॉ. पद्मनाभन ने बताया कि डेंगू आम तौर पर तीन चरणों में बढ़ता है। पहले चरण में मरीज को तेज बुखार रहता है। आमतौर पर पांचवें या छठे दिन बुखार कम होने के बाद मरीज क्रिटिकल फेज में पहुंच सकता है।
इस दौरान पेट में तेज दर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरने पर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। नाक, मुंह या यूरिनरी ट्रैक्ट से भी खून आने की स्थिति बन सकती है। डॉक्टर ने लोगों से तेज बुखार होने पर इलाज में देरी न करने और तुरंत चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की है।
घर के आसपास जमा पानी न रहने दें
डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने देने पर जोर दिया गया है। लोगों को फूलों के गमलों, फ्रिज के पीछे या किसी अन्य जगह जमा पानी को नियमित रूप से साफ करने की सलाह दी गई है।
साफ पानी रखने वाले सभी बर्तनों और कंटेनरों को ढककर रखने की भी अपील की गई है। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर बेड और चिकित्सा संसाधनों की संख्या बढ़ाने की तैयारी भी की गई है।