कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने अपनी 16 जुलाई 2026 की मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री से परिसीमन को लेकर सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।
खरगे ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना है, तो उससे पहले सभी राजनीतिक दलों को प्रस्तावों को विस्तार से समझने और उन पर विचार करने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख इस मुद्दे पर बिल्कुल स्पष्ट है। खरगे ने मांग की कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बरकरार रखा जाए।
इसके साथ ही उन्होंने राज्यों के हिसाब से लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को भी अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग की। खरगे ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाना चाहिए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के संकेतों का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि सरकार आगे बढ़ने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाकर परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा करे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को प्रस्तावों को समझने और उनका अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। खरगे ने परिसीमन को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के प्रस्तावों को आगे न बढ़ाया जाए।
परिसीमन का मतलब आबादी के आधार पर लोकसभा क्षेत्रों और सीटों की सीमाओं में बदलाव करना है। इस मुद्दे पर देश में उत्तर-दक्षिण का राजनीतिक मतभेद भी सामने आया है। दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण भविष्य में उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है, जबकि अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों की सीटों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से विपक्षी दल मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या और राज्यों के बीच सीटों के बंटवारे को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।