नई दिल्ली में 16 मई को NETWORK-10 द्वारा ‘संत संसद’ कार्यक्रम का आयोजिन किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से आए संतों, धर्माचार्यों ने राष्ट्र, धर्म और संस्कृति से जुड़े अहम विषयों पर मंथन किया। इस विशेष आयोजन में सामाजिक समरसता, जातिवाद के दुष्प्रभाव, धर्मांतरण की चुनौतियां, तीर्थ स्थलों के विकास और भारत की आध्यात्मिक तथा आर्थिक शक्ति जैसे मुद्दों पर भी संवाद हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य संत समाज के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रभक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
इस कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम जी महाराज भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गांधी जी ने कहा था जब ये देश आजाद होगा तो इसका ब्लूप्रिंट रामराज्य होगा। जगद्गुरु ने रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि राम वन गए इसलिए राम राम बने। इस देश में कभी भी राजा की पूजा नहीं हुई है। इस देश में हमेशा फकीर की पूजा हुई है। त्रेता युग में भी राजा राम की नहीं बल्कि वनवासी राम की पूजा हुई है।
जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा संन्यास की शोभा भोग में नहीं है और संन्यासी का सामर्थ्य भी भोग में नहीं है। राजनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति धर्म का एक भाग है। धर्म बाप है तो राजनीति उसका पुत्र है। लेकिन आज राजनीति और राजसत्ता धर्म पर भारी हो रही है। धर्म की सत्ता हावी नहीं है।